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[PDF] प्रीलिम्स फैक्ट्स - Drishti IAS 01 मई से 31 मई, 2019 तक पीडीएफ डाउनलोड


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[PDF] प्रीलिम्स फैक्ट्स - Drishti IAS 01 मई से 31 मई, 2019 तक पीडीएफ डाउनलोड

आज में आप सभी के लिए एक बहुत ही जरुरी पोस्ट लेकर आया हुँ। सबसे पहले मैं आप सभी को बताना चाहुँगा कि इस पोस्ट का श्रेय Drishti IAS को जाता है। यह आर्टिकल मैंने उनकी वेबसाइट से ली है। जो अलग-अलग तिथि कर के थी हमनें उसे महीने के हिसाब से कर दिया है। बाकि आप नीचे पढ़ सकते है और पीडीएफ भी डाउनलोड कर सकते है।

प्रीलिम्स फैक्ट्स: 01 मई, 2019

 जापान का राजतंत्र
  • 30 अप्रैल, 2019 को जापान के नए सम्राट ‘नारुहितो’ ने औपचारिक रूप से सिंहासन ग्रहण किया और वे जापान के 126 वें सम्राट बने।
  • ज्ञातव्य है कि अकिहितो ने स्वैच्छिक रूप से सिंहासन त्यागने की इच्छा व्यक्त की थी, जबकि वह अभी भी कार्य करने में सक्षम हैं।
  • स्वैच्छिक रूप से सिंहासन त्यागने की यह घटना 200 वर्षों से अधिक समय में पहली बार हुई है।
  • गौरतलब है कि युवराज नारुहितो के राजगद्दी संभालते ही जापान में नए शाही युग ‘रीवा’(Reiwa) की शुरुआत हो गई है।
  • ‘रीवा’ युग की शुरुआत के साथ ही 1989 में शुरू हुए ‘हीसेई युग’ (Heisei Era) का अंत हो गया।
  • जापान के वर्तमान संवैधानिक प्रावधानों के तहत सम्राट ‘राज्य और अपने लोगों की एकता का प्रतीक’ है।
  • सम्राट के पास कोई वास्तविक राजनीतिक शक्ति नहीं होती है लेकिन उसे राज्य के प्रमुख और संवैधानिक सम्राट के रूप में माना जाता है।

सुपरबग

  • सुपरबग एक ऐसा सूक्ष्मजीव है, जिस पर एंटीमाइक्रोबियल ड्रग्स का प्रभाव नहीं पड़ता। एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोध विकसित करने वाले सूक्ष्मजीवों को ‘सुपरबग’ के नाम से जाना जाता है।
  • एंटीबायोटिक दवाओं का धड़ल्ले से प्रयोग किये जाने के कारण बैक्टीरिया में इनके प्रति प्रतिरोधी क्षमता विकसित हो गई है जिससे उनपर दवाओं का असर न के बराबर हो रहा है।
  • यही प्रभाव अन्य सूक्ष्मजीवियों (Micro-Organism) के संदर्भ में भी देखा जा रहा है, यानी एंटीफंगल (Antifungal), एंटीवायरल (Antiviral) और एंटीमलेरियल (Antimalarial) दवाओं का असर भी कम होने लगा है।
  • अतः एंटीबायोटिक प्रतिरोध (Antibiotic Resistance) ही नहीं बल्कि एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोध (Antimicrobial Resistance)भी आज समस्त विश्व के लिये एक बड़ा खतरा बना हुआ है, क्योंकि इसके कारण सामान्य बीमारियों के चलते भी मौत हो सकती है।

लाल सागर में प्रवाल भित्ति

  • वैज्ञानिकों के अनुसार, लाल सागर में पाए जाने वाले प्रवाल पर्यावरण परिवर्तन के प्रति सबसे अधिक अनुकूलन क्षमता प्रदर्शित करते हैं।
  • इन प्रवालों में अधिक तापमान, लवणता एवं प्रतिकूल पर्यावरणीय दशाओं के प्रति असाधारण अनुकूलन क्षमता पाई गई।
  • लाल सागर, हिंद महासागर का विस्तार है, जो अरब प्रायद्वीप और अफ्रीका के बीच स्थित है।

प्रीलिम्स फैक्ट्स: 02 मई, 2019

99942 एपोफिस
क्षुद्रग्रह 99942 एपोफिस (APOPHIS) 13 अप्रैल, 2029 को पृथ्वी की सतह से लगभग 31,000 किमी. ऊपर से होकर गुजरेगा।
  • 99942 एपोफिस 340 मीटर चौड़ा है।
  • मिस्र के अराजकता के देवता के नाम पर इस क्षुद्रग्रह का नाम रखा गया है।
  • हालाँकि, इस क्षुद्रग्रह से पृथ्वी को कोई खतरा नहीं है लेकिन इसके आकार ने वैज्ञानिक समुदाय के बीच उत्सुकता बढ़ा दी है।
क्षुद्रग्रह
  • क्षुद्रग्रहों को कभी-कभी ‘छोटे ग्रह’ (Minor Planets) भी कहा जाता है।
  • ये चट्टानी अवशेष हैं, जिन्हें लगभग 4.6 बिलियन वर्ष पूर्व सौरमंडल के आरंभिक निर्माण के दौरान छोड़ दिया गया था।
  • सभी क्षुद्रग्रहों का कुल द्रव्यमान पृथ्वी के उपग्रह के द्रव्यमान से कम होता है। 150 से अधिक क्षुद्रग्रहों के दो चन्द्रमा हैं।
  • इसलिये इन्हें ‘बाइनरी क्षुद्रग्रह’ भी कहा जाता है। इसमें एक समान आकार के दो चट्टानी पिंड एक दूसरे की परिक्रमा करते हैं।
  • इनका वर्गीकरण मुख्य क्षुद्रग्रह पट्टी (Main Asteroid Belt), ट्रोजन्स (Trojans) और पृथ्वी के समीप उपस्थित क्षुद्रग्रह (Near Earth Asteroids) के रूप में किया जाता है।

अंतर्राष्ट्रीय मज़दूर दिवस

1 मई को दुनिया भर में ‘अंतर्राष्ट्रीय मज़दूर दिवस’ (International Labor Day) मनाया जाता है। इसे मई दिवस (May Day) के नाम से भी जाना जाता है।
  • दुनिया भर में सभी कामगारों व श्रमिकों के सम्मान में यह दिवस आयोजित किया जाता है।
  • वर्ष 1889 में अंतर्राष्ट्रीय समाजवादी सम्मेलन (International Socialist Conference) ने हेमार्केट नरसंहार (Haymarket Massacre) में मारे गए निर्दोष लोगों की याद में इस दिवस को मनाने का फैसला किया था।
हेमार्केट नरसंहार
  • 1886 में अमेरिकी मज़दूर संघों द्वारा यह निश्चय किया गया कि वे 8 घंटे से अधिक काम नहीं करेंगे और उन्होंने अपनी मांग के समर्थन में हड़ताल शुरू कर दी।
  • इस हड़ताल के दौरान शिकागो के हेमार्केट में एक बम विस्फोट की घटना हुई, जिसमें 100 से अधिक लोग घायल हुए।
  • इस घटना की प्रतिक्रिया में पुलिस ने जवाबी कार्यवाही करते हुए मज़दूरों पर गोली चला दी जिसमें इसमें कई मज़दूर मारे गए।
  • भारत में मज़दूर दिवस कामकाजी लोगों के सम्‍मान में मनाया जाता है। भारत में लेबर किसान पार्टी ऑफ हिन्‍दुस्‍तान द्वारा 1 मई, 1923 को मद्रास में इसकी शुरुआत की गई। हालाँकि उस समय इसे मद्रास दिवस के रूप में मनाया गया था।

चंद्रयान 2

हाल ही में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (Indian Space Research Organisation-ISRO) ने जानकारी दी कि इस वर्ष जुलाई में चंद्रयान-2 लॉन्च किया जाएगा।
  • चंद्रयान- 2 (चंद्रमा के लिये भारत का दूसरा मिशन) पूरी तरह से स्वदेशी मिशन है। गौरतलब है कि इस मिशन में तीन मॉड्यूल होंगे जो इस प्रकार हैं-
♦ ऑर्बिटर
♦ लैंडर (विक्रम)
♦ रोवर (प्रज्ञान)
  • जीएसएलवी मार्क-3 चंद्रयान-2 आर्बिटर और लैंडर को धरती की कक्षा में स्थापित करेगा, जिसके बाद उसे चाँद की कक्षा में पहुँचाया जाएगा।
  • चंद्रयान-2 के चंद्रमा की कक्षा में पहुँचने के बाद लैंडर चांद की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग करेगा और रोवर को तैनात करेगा।
  • रोवर पर लगाए गए उपकरण चंद्रमा की सतह का अवलोकन करेंगे और डेटा भेजेंगे, जो चंद्रमा की मिट्टी के विश्लेषण के लिये उपयोगी होगा।

नियमगिरि हिल्स

हाल ही में 16 सदस्यीय फैक्ट-फाइंडिंग टीम ने निष्कर्ष निकाला है कि लांजीगढ़ (कालाहांडी) में वेदांता रिफाइनरी के पास रहने वाले ग्रामीणों को लाल मिट्टी के तालाब (रिफाइनरी द्वारा उत्पन्न अपशिष्ट) से आने वाली धूल के कारण गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
  • 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने वेदांता लिमिटेड द्वारा नियमगिरि से बॉक्साइट का खनन किये जाने की योजना को खारिज कर दिया था।
  • नियमगिरि दक्षिणी ओडिशा के रायगडा और कालाहांडी ज़िलों में एक पहाड़ी क्षेत्र है।
  • नियमगिरि के मूल निवासियों में मुख्य रूप से कुटिया कोंध और डोंगरिया कोंध नामक दो जनजातियाँ हैं, जो इन पहाड़ियों को अपने देवता नियाम राजा का आवास मानती हैं।
  • ओडिशा में 700 मिलियन टन ज्ञात बॉक्साइट भंडार है, जिसमें से 88 मिलियन टन नियमगिरि में होने का अनुमान लगाया गया है।

प्रीलिम्स फैक्ट्स: 03 मई, 2019

विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस

दुनिया भर में 3 मई को ‘विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस’ (World Press Freedom Day) मनाया जाता है।
  • इस वर्ष विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस की थीम ‘Media for Democracy: Journalism and Elections in Times of Disinformation’ है।
  • यूनेस्को की जनरल कॉफ्रेंस की सिफारिश के बाद दिसंबर 1993 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस की घोषणा की थी। तब से हर वर्ष 3 मई (विंडहोक घोषणा की सालगिरह) को विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया जाता है।
  • विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस का उद्देश्य प्रेस की आज़ादी के महत्त्व के प्रति जागरूकता फैलाना है।

पंचलोहा की मूर्तियाँ

पंचलोहा पारंपरिक रूप से सोना, सिल्वर, कॉपर, जिंक और आयरन का मिश्र धातु होता है।
  • कुछ मामलों में जस्ता के बजाय टिन या सीसा का उपयोग भी किया जाता है।
  • यह एक प्राचीन शिल्प है जो अपनी सुंदरता और उससे जुड़ी परंपरा की भावना के कारण विकसित हुआ।
  • यह दक्षिण भारत का विशिष्ट कला रूप है एवं अक्सर तस्करी के कारण खबरों में रहती है।
  • पंचलोहा में धातुओं के संयोजन एवं बनावट की व्याख्या शिल्प शास्त्र में वर्णित है।
  • ज्ञातव्य है कि शिल्प शास्त्र प्राचीन ग्रंथों का एक संग्रह है, जिसमें कला, शिल्प और उनके डिज़ाइन, नियमों, सिद्धांतों और मानकों का वर्णन है।
  • तंजावुर ज़िले का स्वामीमलाई कांस्य और पंचलोहा उत्पादों का केंद्र है।
  • भारत सरकार ने स्वामीमलाई के इस कला रूप को पेटेंट प्रदान किया है।

पोल्ट्री फार्मिंग के लिये मसौदा नियम

उच्च न्यायालय द्वारा पोल्ट्री फार्मों में क्रूरता के संबंध में दिये गए एक निर्देश के पश्चात् पशुओं के प्रति क्रूरता का रोकथाम नियम, 2019 के तहत मसौदा नियमों को रखा गया है
  • इस मसौदा नियम के अंतर्गत निम्नलिखित बिंदु शामिल हैं-
♦ देश में पोल्ट्री फार्मों का न्यूनतम स्थान 550 वर्ग सेमी. से कम नहीं होना चाहिये।
♦ 6-8 अधिक-से-अधिक पक्षियों को एक पिंजरे में रखा जा सकता है।
♦ एंटीबायोटिक्स का उपयोग केवल चिकित्सीय उद्देश्यों की पूर्ति के लिये किया जाना चाहिये और वह भी पशुचिकित्सक के देखरेख में।

पिंगुली चित्रकथा

  • कला का यह रूप 17वीं शताब्दी में महाराष्ट्र के सिंधुदुर्ग ज़िले में स्थित पिंगुली गाँव में प्रसिद्ध हुआ।
  • यह आदिवासी कला है, जिसका अभ्यास महाराष्ट्र के ठाकर जनजाति द्वारा किया जाता है।
  • ठाकर समुदाय एक अनुसूचित जनजाति है जिसकी आबादी 2000 है।
  • माना जाता है कि इसकी पुन: छत्तीस उप-जातियाँ है।
  • उप-जाति को जमात के रूप में भी जाना जाता है।
  • इस चित्रकथा के चार रूप हैं:
♦ चमड़े की छाया कठपुतलियाँ
♦ लकड़ी की कठपुतलियाँ (कालसूत्री)
♦ चित्रकथाएँ (चित्रकथा)
♦ बुलॉक आर्ट शो

शेवेलियर डी एल ऑर्डर नेशनल डी ला लीजेंड ऑनर

हाल ही में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के पूर्व चेयरमैन ए. एस. किरण कुमार को फ्राँस ने अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'शेवेलियर डी एल ऑर्डर नेशनल डी ला लीजेंड ऑनर' (Chevalier de l'Ordre national de la Légion d'Honneur) से सम्मानित किया है।
  • किरण कुमार को यह सम्मान भारत-फ्राँस अंतरिक्ष सहयोग के विकास में उनके द्वारा निभाई गई भूमिका के लिये दिया गया है।
  • गौरतलब है कि 'शेवेलियर डी एल ऑर्डर नेशनल डी ला लीजेंड ऑनर' 1802 में नेपोलियन बोनापार्ट ने शुरू किया था।
  • ए. एस. किरण कुमार भारत के प्रसिद्ध वैज्ञानिक हैं।
  • वे वर्ष 2015 से वर्ष 2018 तक इसरो के चेयरमैन रहे और इससे पूर्व वे अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र, अहमदाबाद के निदेशक थे।

रीलिम्स फैक्ट्स: 04 मई, 2019

डेनिसोवन

हाल ही में वैज्ञानिकों ने रहस्यमय प्राचीन-होमिनिन समूह के अब तक के सबसे बड़े जीवाश्म (जबड़े की हड्डी) का पता लगाया है। गौरतलब है कि इस प्राचीन-होमिनिन समूह को डेनिसोवन के रूप में जाना जाता है।
  • तिब्बती पठार पर खोजा गया डेनिसोवन समूह का यह जीवाश्म 160,000 वर्ष से भी अधिक पुराना है और साइबेरियन गुफा के बाहर पाया जाने वाला पहला जीवाश्म भी है। एक दशक पहले साइबेरियन गुफा में ही इस होमिनिन समूह का पता चला था।
  • साइबेरियन गुफा के बाहर इस जीवाश्म का पाया जाना इस बात की पुष्टि करता है कि यह प्राचीन-होमिनिन समूह अनुमान से कहीं अधिक बड़े पैमाने पर कई क्षेत्रों में फैले हुए थे।
  • होमिनिन मनुष्य सदृश्य जीवों के बड़े समूह या परिवार का हिस्सा होते हैं, जिन्हें होमिनिड्स कहा जाता है। होमिनिड्स में ओरांगुटान, गोरिल्ला, चिंपांजी और इंसान शामिल हैं।

वेस्ट टू वेल्थ के लिये ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’

आईआईटी दिल्ली और केंद्र सरकार के मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार ने नई दिल्ली में ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ की स्थापना करने के लिये हाल ही में सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किये। गौरतलब है कि इसका उद्देश्य देश में कूड़े के प्रबंधन में विभिन्न विज्ञान और प्रौद्योगिकी के प्रयोगों को क्रियान्वित करना है।
  • आईआईटी, दिल्ली कूड़ा प्रबंधन के क्षेत्र में दिल्ली में पहले से ही कार्यरत है और कूड़ा प्रबंधन से जुड़े मुद्दों पर दिल्ली प्रशासन के साथ काम कर रहा है।
  • इस योजना का प्रमुख उद्देश्य विभिन्न राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय शिक्षण संस्थानों, उद्योगों, अनुसंधान प्रयोगशालाओं तथा अन्य एजेंसियों के पास उपलब्ध तकनीक का प्रयोग करते हुए पायलट परियोजनाओं की स्थापना कर भारतीय परिस्थितियों के अनुसार प्रौद्योगिकी का सर्वश्रेष्ठ प्रयोग करना है।
  • इस परियोजना का उद्देश्य कूड़े से विभिन्न तरह की ऊर्जा उत्पन्न कर भारत को कूड़ा मुक्त राष्ट्र बनाना है ताकि ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को शून्य किया जा सके और स्वास्थ्य संबंधी दुष्परिणामों से बचा जा सके।
  • इस कार्यक्रम के तहत आईआईटी दिल्ली में वेस्ट टू वेल्थ (Waste to Wealth) कार्यक्रम प्रबंधन केंद्र की स्थापना की जाएगी।
  • ‘वेस्ट टू वेल्थ मिशन’ को हाल ही में गठित प्रधानमंत्री की वैज्ञानिक प्रौद्योगिकी और नवाचार सलाहकार परिषद (Prime Minister’s Science, Technology & Innovation Advisory Council- PM-STIAC) द्वारा अनुमति प्रदान की गई है।

रीलिम्स फैक्ट्स: 06 मई, 2019

भारत-ब्रिटेन नौसेना सहयोग

भारत और ब्रिटेन द्वारा एक नए अत्याधुनिक एयरक्राफ्ट कैरियर बनाने के लिये बातचीत की जा रही है। गौरतलब है कि इसे ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम के एक हिस्से के रूप में ब्रिटेन की एचएमएस क्वीन एलिजाबेथ (HMS Queen Elizabeth) की तर्ज पर बनाया जाएगा।
  • भारतीय नौसेना ने 65,000 टन के युद्धपोत एचएमएस क्वीन एलिजाबेथ की विस्तृत योजना को खरीदने और 2022 में ‘आईएनएस विशाल’ नामक एक नया संस्करण बनाने की इच्छा जाहिर की है।
  • इस विमान वाहक के डिज़ाइन पर ब्रिटिश और फ्राँसीसी एयरोस्पेस बीएई और थेल्स (BAE and Thales) का स्वामित्व है।
  • भारतीय नौसेना और स्थानीय उद्योग की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिये ब्रिटेन के इस विमान वाहक के डिज़ाइन में संशोधन किया जाएगा।
  • यह विमान वाहक भारत के INS विक्रमादित्य (जिसे 2004 में रूस से खरीदा गया) और निर्माणाधीन INS विक्रांत के साथ काम करेगा और भारतीय नौसेना को मज़बूती प्रदान करेगा।

जाँघिल या पेंटेड स्टॉर्क

जाँघिल या जांघिल (Painted stork) पक्षियों के स्टॉर्क परिवार की एक प्रजाति है।
  • छिछले पानी का यह पक्षी भारतीय उपमहाद्वीप और दक्षिण-पूर्व एशिया में पाया जाता है।
  • यह पक्षी नवंबर-दिसंबर में दक्षिण-पूर्व एशिया से भारतीय उपमहाद्वीप में प्रवास करता है।
  • जल की कमी और छोटी मछलियों की संख्या में गिरावट की वज़ह से इस पक्षी की आबादी लगातार कम हो रही है।

राष्ट्रीय संकट प्रबंधन समिति (NCMC)

कैबिनेट सचिवालय में एक राष्ट्रीय संकट प्रबंधन समिति (National Crisis Management Committee-NCMC) का गठन किया गया है। जिसके अध्यक्ष कैबिनेट सचिव हैं।
  • इस समिति का उद्देश्य प्राकृतिक आपदा के समय राहत कार्यों का प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित करना है।
  • इस समिति में कैबिनेट सचिव और सभी संबंधित मंत्रालयों/विभागों के सचिवों के साथ-साथ अन्य संगठन भी शामिल हैं।

रीलिम्स फैक्ट्स: 07 मई, 2019

हनी मिशन

खादी और ग्रामोद्योग आयोग (Khadi and Village Industries Commission-KVIC) ने शहद उत्पादन और किसानों की आय बढ़ाने के लिये अपनी ‘हनी मिशन’ पहल के तहत दो साल से भी कम समय में देश भर के किसानों और बेरोजगार युवाओं के बीच एक लाख से अधिक मधुमक्खियों के बक्से वितरित किये हैं।
  • हनी मिशन के तहत खादी और ग्रामोद्योग आयोग किसानों को प्रशिक्षण के साथ ही मधुमक्खियों के पालन हेतु बक्से भी प्रदान करता है।
  • इस मिशन को अगस्त 2017 में ‘स्वीट रिवोल्यूशन’ के अनुरूप ही लॉन्च किया गया था।
♦ मधुमक्खी पालन और इससे जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिये वर्ष 2016 में 'स्वीट रिवोल्यूशन' की शुरुआत की गई थी।
  • खादी और ग्रामोद्योग आयोग के अनुसार, इस मिशन की मदद से 10,000 से अधिक नए रोज़गार पैदा किये गए हैं।
खादी और ग्रामोद्योग आयोग (KVIC)
  • यह खादी और ग्रामोद्योग आयोग अधिनियम, 1956 के तहत स्थापित एक वैधानिक निकाय है।
  • यह संगठन सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय, भारत सरकार के प्रशासनिक नियंत्रण में कार्यरत है।

स्‍कॉर्पीन वर्ग की चौथी पनडुब्‍बी वेला

हाल ही में स्‍कॉर्पीन श्रेणी की पनडुब्बी ‘वेला’ (VELA) को मुंबई में लॉन्च किया गया है जिसका उद्देश्य सामरिक दृष्टि से समुद्री क्षेत्रों की सुरक्षा क्षमता को बढ़ावा देना है। इस पनडुब्बी को परीक्षणों के बाद इसे नौसेना में शामिल कर लिया जाएगा। गौरतलब है कि ‘वेला’ भारत में फ्राँसीसी सहयोग से निर्मित की जा रही छह अंतर्जलीय युद्धपोतों में से चौथी है।
  • मझगांव डॉक शिपबिल्‍डर्स लिमिटेड द्वारा इस पनडुब्‍बी का निर्माण मेक इन इंडिया कार्यक्रम के तहत किया जा रहा है जिसे रक्षा उत्‍पाद विभाग सक्रियता से लागू कर रहा है।
  • स्‍कॉर्पीन वर्ग की पनडुब्बियाँ किसी आधुनिक पनडुब्बी के सभी कार्य करने में सक्षम हैं, जिसमें एंटी-सर्फेस और एंटी-सबमरीन युद्ध शामिल हैं।
पृष्ठभूमि
  • प्रोजेक्ट 75 के तहत मझगाँव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL), मुंबई द्वारा स्कॉर्पिन वर्ग की छह पनडुब्बियों का निर्माण किया जा रहा है।
  • स्कॉर्पिन वर्ग की पनडुब्बियाँ परंपरागत रूप से डीज़ल-इलेक्ट्रिक इंजनों से चलने वाली पनडुब्बियाँ हैं।
  • इसके लिये अक्तूबर 2005 में फ्राँस के नेवल ग्रुप के साथ समझौता किया गया था, जो स्कॉर्पिन श्रृंखला की पनडुब्बियों के निर्माण और आवश्यक तकनीकी हस्तांतरण में सहायता कर रहा है।
  • हालाँकि निर्माण कार्य में विलंब के चलते इस कार्यक्रम में चार साल की देरी हुई है।
  • 14 दिसंबर, 2017 को स्कॉर्पिन श्रेणी की पहली पनडुब्बी ‘आईएनएस कलवारी’ को आधिकारिक रूप से भारतीय नौसेना में शामिल किया गया था।
  • दूसरी स्कॉर्पिन पनडुब्बी ‘आईएनएस खांदेरी’ जनवरी 2017 में लॉन्च की गई थी।
  • शेष दो पनडुब्बियाँ- वागीर (Vagir) और वाग्शीर (Vagsheer) अभी निर्माण के विभिन्न चरणों में हैं, जिन्हें 2020 तक पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है।

मौजूदा स्कूलों के लिये GRIHA

हाल ही में एकीकृत आवास मूल्यांकन के लिये ग्रीन रेटिंग (GRIHA- Green Rating for Integrated Habitat Assessment) काउंसिल ने पूरे भारत के मौजूदा स्कूलों के पर्यावरण मूल्यांकन हेतु एक टूल ‘GRIHA for Existing Day Schools’ जारी किया है।
  • यह रेटिंग स्कूलों के पर्यावरणीय प्रभाव के मूल्यांकन में बच्चों को शामिल करके सतत् विकास की अवधारणाओं से उन्हें परिचित कराती है।
  • यह रेटिंग सह-निर्माण और समझ संबंधी दृष्टिकोण का उपयोग करते हुए प्रकृति के साथ-साथ एक-दूसरे से संपर्क स्थापित करने में छात्रों और शिक्षकों की मदद करेगी।
GRIHA रेटिंग
  • GRIHA या एकीकृत आवास मूल्यांकन के लिये ग्रीन रेटिंग, भवन निर्माण हेतु भारत की राष्ट्रीय रेटिंग प्रणाली है।
  • इसकी कल्पना ऊर्जा और संसाधन संस्थान (The Energy and Resources Institute- TERI) द्वारा की गई थी और इसे नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के साथ संयुक्त रूप से विकसित किया गया था।

पर्पल फ्रॉग

शोधकर्त्ताओं ने पाया है कि पर्पल फ्रॉग (Nasikabatrachus sahyadrensis), लगभग पूरी जिंदगी भूमिगत सुरंगों में रहता है, एक वर्ष में एक ही दिन के लिये सतह पर निकलता है और अंडे देने के बाद पुनः पृथ्वी की सबसे गहरी परतों में लौट जाता है।
  • गौरतलब है कि इसे जल्द ही केरल के राज्य उभयचर के रूप में नामित किया जा सकता है।
  • इसे इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (International Union for Conservation of Nature-IUCN) की लाल सूची में लुप्तप्राय के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।

प्रीलिम्स फैक्ट्स: 08 मई, 2019

संयुक्त राष्ट्र द्वारा दो भारतीयों को सम्मान

हाल ही संयुक्त राष्ट्र ने अपने 115 शांतिरक्षकों एवं कर्मचारियों को कर्त्तव्य का निर्वहन करते हुए जीवन का बलिदान देने के लिये सम्मानित किया है। गौरतलब है कि सम्मानित किये गए इन शांतिरक्षकों एवं कर्मचारियों में दो भारतीय भी शामिल हैं।
  • कांगो में संयुक्त राष्ट्र संगठन मिशन में सेवा देने वाले पुलिस अधिकारी जितेंद्र कुमार और भारत के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से जुड़ी संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UN Development Programme-UNDP) की कंसल्टेंट शिखा गर्ग सहित कुल 115 लोगों ने शांति के लिये सेवा देते हुए जनवरी 2018 से मार्च 2019 के मध्य कुर्बानी दी।
  • संयुक्त राष्ट्र शांति सेना, संघर्ष से तबाह हो चुके देशों में स्थायी शांति लाने हेतु उचित परिस्थिति के निर्माण में मदद करती है। इसमें नागरिक, पुलिस और सैन्यकर्मी शामिल होते हैं।

बीआरओ का 59वाँ स्थापना दिवस

सीमा सड़क संगठन (Border Road Organization-BRO) ने 7 मई, 2019 को अपना 59वाँ स्थापना दिवस मनाया।
सीमा सड़क संगठन (BRO)
  • सीमा सड़क संगठन की स्थापना 7 मई, 1960 को हुई थी।
  • सीमा सड़क संगठन रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत एक प्रमुख सड़क निर्माण एजेंसी है।
  • यह संगठन सीमा क्षेत्रों में सड़क कनेक्टिविटी प्रदान करने में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।
  • यह पूर्वी और पश्चिमी सीमा क्षेत्रों में सड़क निर्माण और इसके रखरखाव का कार्य करता है ताकि सेना की रणनीतिक ज़रूरतें पूरी हो सकें।
  • संगठन पर 53,000 किलोमीटर सड़कों की ज़िम्मेदारी है। सीमा सड़क संगठन ने भूटान, म्याँमार, अफगानिस्तान आदि मित्र देशों में भी सड़कों का निर्माण किया है।
सीमा सड़क संगठन की भूमिका
  • शांतिकाल में- सीमावर्ती इलाकों में जनरल स्टाफ की ऑपरेशनल सड़कों का विकास व रखरखाव तथा सीमावर्ती राज्यों के आर्थिक व सामाजिक उत्थान में योगदान करना।
  • युद्धकाल में-पुनःतैनाती वाले इलाकों में नियंत्रण रेखा के लिये सड़क का विकास व देखभाल करना। साथ ही सरकार द्वारा युद्धकाल के दौरान विनिर्दिष्ट अन्य अतिरिक्त कार्यों का निष्पादन करना।

चिंतन बैठक

हाल ही में नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (Ministry of New & Renewable Energy-MNRE) ने अक्षय ऊर्जा क्षेत्र के हितधारकों के साथ ‘चिंतन बैठक’ का आयोजन किया।
  • अक्षय ऊर्जा क्षेत्र के प्रमुख प्रतिनिधि, उपकरण निर्माता, वित्तपोषक, विनियामक, थिंक-टैंक, औद्योगिक निकाय और स्किल डेवलपर्स के प्रतिनिधि भी इस बैठक में उपस्थित थे।
  • इस बैठक में अक्षय ऊर्जा क्षेत्र से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया जिसमें सौर, पवन, जैव-ऊर्जा, लघु-पनबिजली, नियामक मुद्दे, बोली और मूल्य निर्धारण, मांग पूर्वानुमान, अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं का वित्तपोषण, ऊर्जा भंडारण, मेक इन इंडिया, भारतीय कार्यबल को कौशल प्रशिक्षण देना आदि कार्य शामिल थे।

कलसा-बंडूरी परियोजना

कर्नाटक नीरवरी निगम लिमिटेड (KNNL) लगभग ₹850 करोड़ मूल्य की कलसा-बंडूरी परियोजना का क्रियान्वयन कर रही है।
  • इस परियोजना का उद्देश्य कर्नाटक के बेलगावी और धारवाड़ ज़िलों को पानी उपलब्ध कराना है।
  • इसमें कलसा और बंडूरी (महादायी नदी की दो सहायक नदियाँ) पर बांधों और नहरों का निर्माण किया जाना शामिल है, जो मालप्रभा नदी (कृष्णा नदी की एक सहायक नदी) को 7.56TMC पानी की आपूर्ति करेंगे। 
  • मालप्रभा नदी धारवाड़, बेलगावी, और गडग ज़िलों में पेयजल की आपूर्ति करती है।

प्रीलिम्स फैक्ट्स: 09 मई, 2019

रेड क्रॉस दिवस

प्रत्येक वर्ष 8 मई को रेड क्रॉस दिवस मनाया जाता है।
  • इस वर्ष इसकी थीम ‘#Love’ है।
  • यह रेड क्रॉस के संस्थापक हेनरी ड्यूनैंट के जन्म दिवस पर मनाया जाता है।
इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ रेड क्रॉस एंड रेड क्रिसेंट सोसाइटीज़ (International Federation of Red Cross and Red Crescent Societies)
  • रेड क्रॉस एक अंतर्राष्ट्रीय संगठन है जिसका उद्देश्य मानव जीवन व स्वास्थ्य का बचाव करना है।
  • इसकी स्थापना युद्ध भूमि पर जख्मी और पीडि़तों को सहायता प्रदान करने के लिये वर्ष 1863 में हेनरी ड्यूनैंट ने जिनेवा में की थी।
  • इसका मुख्यालय जिनेवा, स्विट्ज़रलैंड में है। इसे तीन बार (वर्ष 1917,1944 और 1963) नोबेल शांति पुरस्कार प्राप्त हुआ है।
  • रेड क्रॉस का मुख्य उद्देश्य युद्ध या विपदा के समय में कठिनाइयों से राहत दिलाना है। रेड क्रॉस दिवस प्रतिवर्ष 8 मई को मनाया जाता है।
  • रेड क्रॉस ने मानवता, निष्पक्षता, तटस्थता, स्वतंत्रता, स्वयं प्रेरित सेवा, एकता एवं सार्वभौमिकता के सिद्धांतों को आत्मसात किया है।
  • भारतीय रेड क्रॉस का सोसायटी अधिनियम, 1920 में पारित किया गया है जो शारीरिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने, रोगों को रोकने और पीड़ितोंको सहायता प्रदान करने पर बल देता है।
  • ज्ञातव्य है कि हेनरी ड्यूनैंट  नोबेल शांति पुरस्कार के पहले विजेता थे।

आर्कटिक परिषद में भारत

हाल ही में भारत पुन: आर्कटिक परिषद में पर्यवेक्षक के रूप में चुना गया।
  • आर्कटिक परिषद एक उच्च-स्तरीय अंतर-सरकारी फोरम है।
  • इसकी स्थापना वर्ष 1996 में ओटावा घोषणा के तहत आर्कटिक देशों के मध्य सहयोग, समन्वय और बातचीत को बढ़ावा देने के लिये की गई थी।
  • आर्कटिक के आस पास स्थित देश इसके सदस्य हैं इसके सदस्य देशों में रूस, संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा, नॉर्वे, डेनमार्क, स्वीडन, आइसलैंड और फिनलैंड शामिल हैं।
पर्यवेक्षक राष्ट्र का दर्ज़ा
  1. चीन, भारत, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, इटली और जापान को परिषद में पर्यवेक्षक का दर्ज़ा प्राप्त है।

  1. भारत को पर्यवेक्षक का दर्ज़ा किरुना घोषणा के माध्यम से  दिया गया है।

  1. पर्यवेक्षकों को सक्रिय बैठकों में भाग लेने की अनुमति नहीं है। वे आमतौर पर साइड इवेंट में भाग लेते हैं।

  1. आर्कटिक परिषद में पर्यवेक्षक का दर्ज़ा गैर-सरकारी संगठनों के साथ अंतर-सरकारी और अंतर-संसदीय संगठनों के लिए खुला है।

अरुणाचल पिट वाइपर

उभयचरों पर अध्ययन करने वाले विशेषज्ञों (Herpetologists) ने अरुणाचल प्रदेश के कामेंग ज़िले के जंगल से लाल-भूरे रंग के पिट वाइपर की एक अद्वितीय और नई प्रजाति की खोज की है जो गर्मी के प्रति संवेदनशील है।
  • पिट वाइपर की यह नई प्रजाति, ट्राइमेरासुरस अरुणाचलेंसिस (Trimeresurus Arunachalensis) है। यह भारत के सभी ज्ञात पिट वाइपरों से भिन्न है।
  • यह पिट वाइपर की ऐसी पहली प्रजाति है जिसका नाम राज्य के नाम पर रखा गया है।
  • यह दुनिया के सभी ज्ञात पिट वाइपरों में सबसे दुर्लभ है।
  • भारत में अन्य ज्ञात पिट वाइपर इस प्रकार हैं-
  • मालाबार पिट वाइपर (Trimeresurus malabaricus)
  • हॉर्सशू पिट वाइपर (Trimeresurus strigatus Gray)
  • हम्प-नोज्ड पिट वाइपर (Hypnale hypnale Merrem)
  • हिमालयन पिट वाइपर (Protobothrops himalayanus)

पट्टचित्र चित्रकारी

साइक्लोन फणि ने ओडिशा में कई क्षेत्रों को नुकसान पहुँचाया है। जिनमें से पट्ट चित्रकारी के लिये प्रसिद्ध स्थान  भी शामिल है।
  • ज्ञातव्य है कि पट्टचित्र शैली ओडिशा के सबसे पुराने और लोकप्रिय कला रूपों में से एक है।
  • पट्टचित्र का नाम संस्कृत शब्दों पट्ट (कैनवास) और चित्र से लिया गया है।
  • पट्टचित्र कैनवास पर की जाने वाली एक ऐसी चित्रकला है जिसमें समृद्ध रंगों का प्रयोग, रचनात्मक रूपांकन और डिज़ाइनों तथा सरल विषयों का चित्रण किया जाता है। इस चित्रकला में ज़्यादातर चित्र पौराणिक विषयों पर आधारित होते हैं।
  • इस कला के माध्यम से प्रस्तुत कुछ लोकप्रिय विषय हैं- थिया बधिया - जगन्नाथ मंदिर का चित्रण; कृष्ण लीला - भगवान कृष्ण के रूप में जगन्नाथ का एक बच्चे के रूप में अपनी शक्तियों का प्रदर्शन; दासबतारा पट्टी - भगवान विष्णु के दस अवतार; पंचमुखी - भगवान गणेश का पाँच मुख वाले देवता के रूप में चित्रण।
  • पट्टचित्र को कपड़े पर चित्रित करते समय कैनवास को पारंपरिक तरीके से तैयार किया है। इसके बेस को नरम, सफेद, चाक पाउडर और इमली के बीज से बने गोंद के साथ लेपन करके तैयार किया जाता है।
  • सबसे पहले पेंटिंग के बॉर्डर को पूरा करने की परंपरा है। फिर चित्रकार हल्के लाल और पीले रंग का उपयोग करके ब्रश के साथ स्केच बनाना शुरू करता है।
  • इसमें आमतौर पर  सफेद, लाल, पीले और काले रंग इस्तेमाल किये जाते हैं।
  • पेंटिंग पूरी होने के पश्चात् इसे चारकोल की जलती आग के ऊपर रखा जाता है और सतह पर लाह/लाख (lacquer) लगाया जाता है।
  • इससे पेंटिंग जल प्रतिरोधी, टिकाऊ और चमकदार बन जाती है।

ASI द्वारा भारतीय कलाकृतियों की पहचान ASI identifies Indian artefacts

हाल ही में भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण (Archaeological Survey of India- ASI) की टीम द्वारा संयुक्त राज्य अमेरिका की यात्रा के दौरान हड़प्पा संस्कृति की टेराकोटा वस्तुओं से लेकर गुप्त काल (5वीं -6वीं शताब्दी ईस्वी) तक की मूर्तियों की एक श्रृंखला की पहचान की गई है।
  • भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण टीम ने न्यूयॉर्क में अमेरिकी सुरक्षा विभाग के आव्रजन और सीमा शुल्क प्रवर्तन द्वारा ज़ब्त कलाकृतियों का निरीक्षण किया।
  • एएसआई की टीम ने लगभग 100 वस्तुओं की पहचान की है जिनमें विभाग द्वारा जब्त 17 वस्तुएँ भी शामिल हैं।
  • इन प्राचीनकालीन वस्तुओं में तमिलनाडु के सुट्टामल्ली (Suttamalli) और श्रीपुरंतन मंदिरों (Sripurantan temples) के सुंदर कांस्य कलाकृतियाँ तथा महाकोका देवता (Mahakoka Devata) की एक अति महत्तवपूर्ण प्रतिकृति भी है।
भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण  (Archaeological Survey of India- ASI)
  • ASI पुरातात्त्विक अनुसंधान, वैज्ञानिक विश्लेषण, पुरातात्त्विक स्थलों की खुदाई, स्मारकों के संरक्षण और राष्ट्रीय महत्त्व के क्षेत्रों के संरक्षण, स्थल संग्रहालयों के रखरखाव तथा प्राचीन वस्तुओं से संबंधित विधायिकाओं के समग्र विनियमन के लिये एक प्रमुख संगठन है।
  • इसकी स्थापना 1861 में हुई।
  • इसका मुख्यालय नई दिल्ली में है।
  • यह संस्कृति विभाग के अधीन एक संलग्न कार्यालय है।
  • एक महानिदेशक, दो संयुक्त महानिदेशक तथा 17 निदेशक कर्त्तव्यों के निर्वहन में महानिदेशक की सहायता करते हैं।

प्रीलिम्स फैक्ट्स: 10 मई, 2019

गोपाल कृष्ण गोखले जयंती

9 मई, 2019 को भारत के प्रधानमंत्री ने स्वतंत्रता सेनानी गोपाल कृष्ण गोखले को उनकी 153वीं जयंती पर श्रद्धांजलि दी।
गोपाल कृष्ण गोखले के बारे में कुछ तथ्य
  • उनका जन्म 9 मई, 1866 को महाराष्ट्र के रत्नागिरी में हुआ था।
  • वह वर्ष 1889 में भारतीय राष्ट्रीय कॉन्ग्रेस में शामिल हुए।
  • वर्ष 1905 में गोखले को भारतीय राष्ट्रीय कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष का चुना गया था।
  • उन्होंने 1905 में सर्वेंट्स ऑफ़ इंडियन सोसाइटी की स्थापना की थी। इस सोसाइटी का मुख्य उद्देश्य भारतीयों को सामाजिक बुराइयों के खिलाफ आवाज़ उठाने और अपने देश की सेवा के लिये प्रशिक्षित करना था।
  • उन्हें महात्मा गांधी के गुरु के रूप में जाना जाता है। महात्मा गांधी ने 'गोखले, मेरे राजनीतिक गुरु' नामक एक पुस्तक भी लिखी थी।

नासा का मिशन डार्ट

नासा स्पेसएक्स के फाल्कन9 (SpaceX Falcon9) रॉकेट द्वारा एक डार्ट (Double Asteroid Redirection Test-DART) मिशन शुरू करने की योजना बना रहा है।
  • इस मिशन के तहत बाइनरी एस्टेरोइड, डिडायमोस के एक छोटे से चन्द्रमा से सितंबर 2022 में टक्कर कराए जाने का लक्ष्य रखा गया है।
  • यह एक ग्रह रक्षा तकनीक है, जिसे 2021 के मध्य में लॉन्च किया जाना है। गौरतलब है कि यह नासा का पहला मिशन है।
  • यह एक ऐसा अंतरिक्ष मिशन है जो काइनेटिक इम्पैक्टर का प्रयोग करते हुए एस्टेरोइड का मार्ग परिवर्तित करने की अपनी क्षमता का प्रदर्शन करेगा।

काइनेटिक इम्पैक्टर

  • काइनेटिक इम्पैक्टर के तहत आकार में बड़े, उच्च गति वाले किसी अंतरिक्ष यान को पृथ्वी के निकट आने वाली वस्तु के मार्ग में भेजा जाता है।

बासवन्ना जयंती

  • संत बासवन्ना (भगवान बसवेश्वर) लिंगायत संप्रदाय के संस्थापक एवं 12वीं सदी के कवि और दार्शनिक थे।
  • बासवन्ना जयंती विशेष रूप से कर्नाटक और महाराष्ट्र राज्य में मनाया जाता है।
संक्षिप्त जीवन परिचय
  • गुरु बसवेश्वर का जन्म 1131 ईसवी में बागेवाड़ी (कर्नाटक के अविभाजित बीजापुर ज़िले में) नामक स्थान पर हुआ था।
  • इनके पिता का नाम मदरासा तथा माता मदालाम्बिके थी। इनका जन्म एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था।
  • आठ वर्ष की आयु में एक धार्मिक परंपरा के अंतर्गत इनका ‘जनिवारा’ (यज्ञोपवीत संस्कार) भी किया गया।
  • बासवन्ना ने इस परंपरा के खिलाफ विद्रोह किया एवं अपने जनेऊ को काट दिया और घर छोड़कर कुडलसंगम चले गए जहाँ से उन्होंने सभी आयामों में शिक्षा प्राप्त की।
  • बाद में वह कल्याण गए जहाँ कलचुरि राजा बिज्जाला (1157- 1167 ईसवी) का शासन था।
  • उनके विद्वल से प्रभावित होकर प्रारंभ में राजा ने उन्हें अपने दरबार में कर्णिका (लेखाकार) नियुक्त किया। तदुपरांत प्रशासनिक कौशल का परिचय देकर उन्होंने प्रधानमंत्री का पद प्राप्त किया।
  • बासवन्ना के उपदेश- बासवन्ना के उपदेशों एवं शिक्षाओं को उपन्यास के रूप में लिपिबद्ध किया गया है जिसे वचन (कविता) कहा जाता है।
  • "शरण आंदोलन" के नवीन साहित्यिक रूप में इनका मुख्य योगदान रहा जिसके माध्यम से उन्होंने अपनी क्रांतिकारी और सुधारवादी विचारधारा को बहुत ही सरल ढंग से कन्नड़ भाषा में व्यक्त किया।
  • संत बसवेश्वर द्वारा चलाए गए 'वचन आंदोलन' का मुख्य लक्ष्य समाज के हर वर्ग का कल्याण था। सकलः जीवतमृग लेसु (सभी का कल्याण हो) उनकी उद्घोषणा थी।
  • उन्होंने दो प्रमुख विचार दिये- ‘स्थावर एवं जंगम’ इनके अर्थ क्रमशः ‘स्थिर’ एवं ‘गतिशील’ हैं। ये दोनों ही विचार क्रांतिकारी विचारधारा के आधार थे।
उन्होंने सामाजिक-लोकतांत्रिक व्यवस्था का समर्थन किया, साथ ही 12वीं सदी में मानवाधिकार की भी बात की।
  • धार्मिक सुधार- उन्होंने मंदिर की अवधारणा को बदलने की कोशिश की जो विभिन्न प्रकार के उत्पीड़न का मुख्य केंद्र था। उन्होंने कहा कि पुजारी और अमीर लोग भगवान और मंदिर के नाम पर आम लोगों का शोषण करते हैं।
  • संत बासवन्ना ने एक नया आयाम दिया जिसके अंतर्गत उन्होंने मानव शरीर और आत्मा (आंतरिक आत्मा) को महत्त्वपूर्ण बताया जिससे सभी मनुष्यों के आत्म-सम्मान को बढ़ावा मिला।
  • बासवन्ना के सम्मान में एक स्मारक सिक्का जारी किया गया ।
  • भारत के प्रधानमंत्री ने 2015 में लैम्बेथ में टेम्स नदी के किनारे उनकी प्रतिमा का उद्घाटन किया।

अंतर्राष्ट्रीय मादक पदार्थ नियंत्रण बोर्ड

हाल ही में संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक परिषद (United Nations Economic and Social Council) ने भारत की जगजीत पवाड़िया को अंतर्राष्ट्रीय मादक पदार्थ नियंत्रण बोर्ड (International Drug Control Board) के लिये एक बार फिर निर्वाचित किया है।
  • जगजीत पवाड़िया का यह दूसरा कार्यकाल है जो 02 मार्च, 2020 से 01 मार्च, 2025 तक होगा। उनका मौजूदा कार्यकाल वर्ष 2020 में समाप्त होना तय था।
अंतर्राष्ट्रीय मादक पदार्थ नियंत्रण बोर्ड
  • अंतर्राष्ट्रीय मादक पदार्थ नियंत्रण बोर्ड एक अर्द्ध-न्यायिक निकाय है, यह नशीली दवाओं पर लगे प्रतिबंधों से जुड़े मामले देखता है।
  • इसकी शुरुआत वर्ष 1909 में शंघाई में अंतर्राष्ट्रीय अफीम आयोग के साथ हुई थी। इसमें 13 सदस्य शामिल हैं।
  • इसका मौजूदा स्वरुप वर्ष 1968 में सामने आया।
संयुक्त राष्ट्र आर्थिक तथा सामाजिक परिषद (ECOSOC)
  • ECOSOC संयुक्त राष्ट्र संघ के कुछ सदस्य राष्ट्रों का एक समूह है।
  • यह परिषद महासभा को अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक एवं सामाजिक सहयोग और विकास कार्यक्रमों में मदद करती है।
  • यह परिषद सामाजिक समस्याओं के माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय शांति को प्रभावी बनाने का कोशिश करती है।
  • ECOSOC की स्थापना वर्ष 1945 की गई थी। इस परिषद में प्रत्येक सदस्य का कार्यकाल तीन वर्ष का होता है।

प्रीलिम्स फैक्ट्स: 11 मई, 2019

चंद्रयान-2

हाल ही में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (Indian Space Research Organisation-ISRO) ने चंद्रयान-2 के संबंध में कहा है कि इस योजनाबद्ध मिशन में 14 भारतीय पेलोड या अध्ययन के उद्देश्य से लगाए गए उपकरण शामिल होंगे।
पृष्ठभूमि
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने जानकारी दी कि इस वर्ष जुलाई में चंद्रयान-2 लॉन्च किया जाएगा।
  • चंद्रयान- 2 (चंद्रमा के लिये भारत का दूसरा मिशन) पूरी तरह से स्वदेशी मिशन है।
  • गौरतलब है कि इस मिशन में तीन मॉड्यूल होंगे जो इस प्रकार हैं-
  • ऑर्बिटर
  • लैंडर (विक्रम)
  • रोवर (प्रज्ञान)
  • जीएसएलवी मार्क-3 चंद्रयान-2 आर्बिटर और लैंडर को धरती की कक्षा में स्थापित करेगा, जिसके बाद उसे चाँद की कक्षा में पहुँचाया जाएगा।
  • चंद्रयान-2 के चंद्रमा की कक्षा में पहुँचने के बाद लैंडर चाँद की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग करेगा और रोवर को तैनात करेगा।
  • रोवर पर लगाए गए उपकरण चंद्रमा की सतह का अवलोकन करेंगे और डेटा भेजेंगे, जो चंद्रमा की मिट्टी के विश्लेषण के लिये उपयोगी होगा।
  • ISRO ने अक्तूबर 2008 में अपना ऑर्बिटर मिशन चंद्रयान -1 लॉन्च किया था।

लूनर लैंडर: ब्लू मून

  • हाल ही में अंतरिक्ष कंपनी ‘ब्लू ओरिजिन’ ने लूनर लैंडर का अनावरण किया है जिसे ब्लू मून कहा जा रहा है।
  • गौरतलब है कि इसका उपयोग 2024 तक चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव तक ‘परिवहन उपकरणों’ और संभवतः मनुष्य के लिये भी किया जा सकता है।
  • यह लैंडर वैज्ञानिक उपकरणों को ले जाने के साथ ही मनुष्यों के लिये भी रोवर ले जाने में सक्षम होगा।
ब्लू मून
  • इसका लक्ष्य चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरना है, जहाँ बर्फ है। हाइड्रोजन का उत्पादन करने के लिये पानी का उपयोग किया जा सकता है, जो भविष्य में सौरमंडल के अन्वेषण में मदद कर सकेगा।
  • यह लैंडर, ब्लू ओरिजिन का चंद्रमा पर अवसंरचना निर्माण के एक विज़न का हिस्सा होगा जो भविष्य में मनुष्यों के अंतरिक्ष में बसने और प्रदूषणकारी उद्योगों को पृथ्वी से दूर स्थानांतरित करने की संभावना को बढ़ाएगा।

मंकीपॉक्स वायरस

वायरसहाल ही में सिंगापुर में पहली बार मंकीपॉक्स वायरस का मामला सामने आया है।
  • यह एक ऐसा ऑर्थोपॉक्स वायरस है जिसके कारण वायरल डीजीज़ हो सकता है जिसके लक्षण स्मालपॉक्स से मिलते-जुलते हैं।
  • यह स्तनधारियों सहित कशेरुकी और अकशेरुकी जीवों में भी पाया जाता है।
  • आमतौर पर इसका संक्रमण संक्रमित जानवरों के संपर्क में आने से होता है। मनुष्य इससे कम ही संक्रमित होते हैं किंतु मध्य और पश्चिम अफ्रीका के गाँवों में इससे जुड़े काफी मामले पाए जाते हैं।
  • इस वायरल के अधिकतर मामले उष्णकटिबंधीय वर्षावनों के करीब पाए जाते है जहाँ लोग संक्रमित जानवरों के अक्सर संपर्क में आते हैं।
  • इस संक्रमण के लिये कोई विशिष्ट उपचार या टीका उपलब्ध नहीं हैं लेकिन इसके प्रकोप को नियंत्रित किया जा सकता है।

दुनिया का सबसे बड़ा टेलिस्कोप

दुनिया के अब तक सबसे बड़े ऑप्टिकल टेलिस्कोप, थर्टी मीटर टेलिस्कोप (TMT) का निर्माण हवाई के मौना नामक स्थान पर किया जा रहा है।
  • थर्टी मीटर टेलीस्कोप एक अत्यंत बड़ा टेलिस्कोप है जिसकी सहायता से अंतरिक्ष में गहराई से देखने के साथ ब्रह्मांडीय वस्तुओं का निरीक्षण किया जा सकेगा।
  • यह  हबल स्पेस टेलीस्कोप की तुलना में 12 गुना अधिक बेहतर रिज़ॉल्यूशन प्रदान करेगा।
  • ‘थर्टी मीटर टेलिस्कोप इंटरनेशनल ऑब्ज़र्वेटरी एलएलसी’ (TIO)/(TMT International Observatory LLC) एक गैर-लाभकारी संगठन है, जिसकी स्थापना मई 2014 में इस परियोजना के निर्माण और संचालन के चरणों को पूरा करने के लिये की गई थी।
  • भारत सरकार ने 1299.8 करोड़ रुपए की कुल लागत के साथ थर्टी मीटर टेलिस्कोप (TMT) परियोजना में 2014-2023 तक भागीदारी हेतु मंज़ूरी दे दी है।
  • भारत की तरफ से यह विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (Department of Science and Technology- DST) और परमाणु ऊर्जा विभाग (Department of Atomic Energy- DAE) की एक संयुक्त परियोजना होगी।

प्रीलिम्स फैक्ट्स: 13 मई, 2019

राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस

11 मई, 2019 को भारत में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस (National Technology Day) मनाया गया।
  • यह दिवस विज्ञान में भारत की दक्षता एवं प्रौद्योगिकी विकास को दर्शाता है।
  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय (Ministry of Science and Technology) प्रतिवर्ष 11 मई को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस मनाता है।
  • राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस को तकनीकी रचनात्मकता, वैज्ञानिक परीक्षण, उद्योग और विज्ञान के एकीकरण में किये गए प्रयासों का प्रतीक माना जाता है।
  • राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस के अवसर पर भारत के राष्ट्रपति राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी पुरस्कार भी प्रदान किये जाते हैं। यह पुरस्कार ऐसे लोगों को दिया जाता है जिन्होंने इस क्षेत्र में अभूतपूर्व काम किया हो।
पृष्ठभूमि
  • राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस की शुरुआत वर्ष 1998 में हुए पोखरण परमाणु बम परीक्षण से हुई थी।
  • भारत ने 11 मई, 1998 को अपना दूसरा सफल परमाणु परीक्षण किया था।

दीया मिर्जा संयुक्त राष्ट्र की विशेष दूत

हाल ही में संयुक्त राष्ट्र (United Nations) ने सतत् विकास लक्ष्य (Sustainable Development Goals-SDGs) की प्राप्ति हेतु भारतीय अभिनेत्री दीया मिर्जा को अपना विशेष दूत बनाया है।
  • संयुक्त राष्ट्र ने दीया मिर्जा और अलीबाबा के प्रमुख जैक मा के साथ ही विश्व के कुल 17 अन्य लोगों को भी सतत् विकास लक्ष्य जैसे विशेष कार्य हेतु चुना है।
  • अभिनेत्री दीया मिर्जा संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (United Nations Environment Programme- UNEP) की सद्भावना दूत के रूप में पहले से ही संयुक्त राष्ट्र से जुड़ी हैं।
उद्देश्य
  • संयुक्त राष्ट्र द्वारा चुने गए ये लोग विश्व भर में संयुक्त राष्ट्र के सतत् विकास लक्ष्यों के बारे में लोगों को जागरूक करेंगे। इन लक्ष्यों में जलवायु परिवर्तन, अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर शांति, गरीबी और असमानता को लेकर संयुक्त राष्ट्र के संदेश को लोगों तक पहुँचाना शामिल है।

तिरुपति गंगा जात्रा

तिरुपति गंगा जात्रा, तिरुपति, आंध्र प्रदेश का वार्षिक लोक उत्सव है। यह उत्सव एक सप्ताह तक चलता है जो हर साल मई के पहले और दूसरे सप्ताह के बीच आता है।
  • इस उत्सव में तिरुपति की देवी गंगम्मा, ग्रामदेवता (गाँव की देखरेख करने वाली देवी) की पूजा अर्चना की जाती है।
  • तिरुपति बालाजी मंदिर की शुरुआत वैष्णववाद में हुई है, जो समानता और प्रेम के सिद्धांतों की वकालत तथा बलि देने की प्रथा को प्रतिबंधित करता है।
  • पवित्र गर्भगृह (जिसमें सात पहाड़ियों के भगवान की विस्मयकारी मूर्ति है) तिरुमाला के मुख्य मंदिर परिसर में स्थित है।
  • श्री वेंकटेश्वर का प्राचीन और पवित्र मंदिर शेषाचलम पर्वतमाला के सातवें शिखर, वेंकटचला (वेंकट पहाड़ी) और श्री स्वामी पुष्करिणी के दक्षिणी तट पर स्थित है।

त्रिशूर पूरम उत्सव

13 मई 2019 से केरल का प्रसिद्ध उत्सव त्रिशूर पूरम आरंभ हुआ।
  • त्रिशूर पूरम दक्षिण भारत का एक महत्त्वपूर्ण उत्सव है जिसे लगातार 36 घंटे तक मनाया जाता है।
  • यह वल्लुनावाडु क्षेत्र में स्थित देवी दुर्गा और भगवान शिव को समर्पित है।
  • केरल स्थित दस मंदिरों को शामिल करके इस उत्सव को मनाया जाता है ।
  • उत्सव में 30 हाथियों को पूरी साज-सज्जा के साथ शामिल किया जाता है।
  • इसकी शुरुआत शक्थान थम्पूरन द्वारा की गई थी।

लेकनोरिसिस ताईवानियाना

हाल ही में असम में लेकनोरिसिस ताईवानियाना (Lecanorchis taiwaniana) खोजा गया है।
  • वनस्पति रूप में दर्ज किया गया यह ऑर्किड ‘खिलने की अवधि (Bloom Period) और आकार’ के संदर्भ में भारत के सबसे छोटे ऑर्किड में से एक है।
  • इससे पहले जापान, ताइवान और लाओस में खोजे गए इस ऑर्किड की अधिकतम ऊँचाई 40 सेमी. और खिलने की अवधि पाँच-छह दिनों की होती थी।
  • लेकनोरिसिस ताईवानियाना एक मायको-हेटरोट्रॉफ (Myco-Heterotroph) है। मायको-हेटरोट्रॉफ ऐसे परजीवी पौधे होते हैं जिनमें प्रकाश संश्लेषण नहीं होता है।
प्रकाश संश्लेषण का परित्याग
  • फूलों के कई ऐसे पौधे हैं जिन्होंने प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) की प्रक्रिया को छोड़ दिया है।
  • ये दो श्रेणियों में वर्गीकृत हैं-
  • हस्टीरियल परजीवी (Haustorial Parasites)
  • मायको-हेटरोट्रॉफ (Myco-Heterotroph)
  • इन्हें परजीवी भी कहा जाता है, क्योंकि ये दोनों पौधे अपने पोषक तत्त्व दूसरे पौधों से प्राप्त करते हैं।

प्रीलिम्स फैक्ट्स: 14 मई, 2019

ABHYAS का सफल परीक्षण

हाल ही में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (Defence Research and Development Organisation-DRDO) ने ओडिशा के चांदीपुर में हाई स्पीड एक्सपेंडेबल एरियल टार्गेट (High-speed Expendable Aerial Target- HEAT) 'ABHYAS' का सफल परीक्षण किया।
  • यह एक मानव रहित हवाई वाहन है जो माइक्रोइलेक्ट्रोमैकेनिकल सिस्टम (Microelectromechanical Systems- MEMS) नेविगेशन प्रणाली पर आधारित है।
  • यह नेविगेशन और मार्गदर्शन के लिये स्वदेशी रूप से विकसित MEMS-आधारित नेविगेशन प्रणाली का उपयोग करता है।
  • MEMS- आधारित INS (जड़त्वीय नेविगेशन प्रणाली) का इस्तेमाल छोटे मानव रहित हवाई वाहनों (Unmanned Aerial Vehicles) में किया जाता है।
  • रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन के अनुसार, ABHYAS ड्रोन के परीक्षण को विभिन्न राडार और इलेक्ट्रो ऑप्टिक सिस्टम द्वारा ट्रैक किया गया और सही तरीके से नेविगेशन मोड में रखा गया था।
  • 'ABHYAS' ड्रोन को ऑटोपायलट मोड में स्वतंत्र उड़ान हेतु डिज़ाइन किया गया है।

भारतीय गैंडों हेतु डीएनए डेटाबेस

पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने देश में पाए जाने वाले सभी गैंडों का डीएनए प्रोफाइल बनाने हेतु एक परियोजना की शुरुआत की है।
  • डेटाबेस तैयार हो जाने के बाद मारे गए या शिकार किये गए गैंडों की पहचान करने में आसानी होगी।
  • यह परियोजना वर्तमान में चल रहे ‘राइनो कंज़र्वेशन प्रोग्राम’ का ही एक हिस्सा है। इस परियोजना की समय-सीमा वर्ष 2021 है।
  • गैंडों की तीन प्रजातियाँ हैं, जिनमें से केवल एक (भारतीय गैंडा) देश में पाई जाती है।
  • भारत में गैंडों की संख्या लगभग 2,600 है, इनमें से 90% से ज़्यादा गैंडे असम के काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में पाए जाते हैं।
  • भारत में गैंडों की अच्छी खासी आबादी थी जो लगभग पूरे देश में पाई जाती थी। किंतु अवैध शिकार की वज़ह से 20वीं सदी के अंत तक इनकी आबादी महज 200 की संख्या पर सिमट गई थी।

भारत अंतर्राष्ट्रीय लोकतंत्र और चुनाव प्रबंधन संस्थान

  • निर्वाचन आयोग ने जून 2011 में ‘भारत अंतर्राष्ट्रीय लोकतंत्र और चुनाव प्रबंधन संस्थान’ (India International Institute of Democracy and Election Management-IIDEM) की स्थापना की थी।
  • भारत अंतर्राष्ट्रीय लोकतंत्र और चुनाव प्रबंधन संस्थान (IIDEM) सहभागी लोकतंत्र और चुनाव प्रबंधन हेतु अनुसंधान और प्रशिक्षण का एक उन्नत संसाधन केंद्र है।
  • यह संस्थान भारत सरकार, संयुक्त राष्ट्र, स्वीडन के ‘इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डेमोक्रेसी एंड इलेक्टोरल असिस्टेंस’ (International Institute of Democracy and Electoral Assistance- IDEA) जैसे राष्ट्रमंडल और अंतर-सरकारी संगठनों के सहयोग से विकसित किया गया है।
  • ‘इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डेमोक्रेसी एंड इलेक्टोरल असिस्टेंस’ के चार घटक इस प्रकार हैं-
  • प्रशिक्षण और क्षमता विकास
  • मतदाता शिक्षा और नागरिक भागीदारी
  • अनुसंधान, नवाचार और प्रलेखन
  • अंतर्राष्ट्रीय परियोजनाएँ और तकनीकी सहयोग।

जलकुंभी

जलकुंभी (Water Hyacinth)/(Eichhornia crassipes) एक अत्यधिक आक्रामक खरपतवार है जिसे कई जलीय पारिस्थितिक तंत्रों के लिये खतरा पैदा करने वाला माना जाता है।
  • जलकुंभी की समस्या उन जल निकायों या जलाशयों में ज़्यादा होती है जिनमें बहाव धीमे हो।
  • जल सतह पर जलकुंभी का घनत्व ज़्यादा होने से अन्य देशी जलीय पौधों पर दुस्प्रभाव पड़ता है। घनत्व ज़्यादा होने से सूर्य का प्रकाश अवरुद्ध होता है और इस प्रकार जलमग्न वनस्पति प्रकाश संश्लेषण में असमर्थ होने के कारण नष्ट होने लगती हैं।
  • इसके साथ ही पानी में ऑक्सीजन की भी कमी होने लगती है और इस जलीय पारिस्थितिकी तंत्र में मछली तथा अन्य जीवों की मृत्यु होने लगती है।
  • हालाँकि ऑक्सीकृत जल की उपलब्धता की स्थिति में इसके कई सकारात्मक पर्यावरणीय लाभ भी होते हैं, जैसे- रिफ्यूजिया की उपलब्धता, मछलियों के लिये फीडिंग सेंटर्स।

प्रीलिम्स फैक्ट्स: 15 मई, 2019

मिशन आर्टेमिस

नासा चंद्रमा हेतु एक नए मानवयुक्त मिशन की योजना बना रहा है जिसका नाम आर्टेमिस होगा।
  • ग्रीक पौराणिक कथाओं के अनुसार, चंद्रमा की देवी, आर्टेमिस, अपोलो की जुड़वाँ बहन थी।
  • वर्ष 2017 में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अंतरिक्ष नीति निर्देश (Space Policy Directive) पर हस्ताक्षर किये थे जिसके पश्चात् मिशन आर्टेमिस की शुरुआत हुई थी। इस मिशन के तहत अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा पर भेजा जाना है।
  • यह 2024 में चंद्रमा के दक्षिण ध्रुव पर उतरेगा और इसमें महिलाओं को भी शामिल किया जाएगा।

LSA में अटलांटिक को पार करने वाली पहली महिला

कैप्टन आरोही पंडित, मुंबई की एक 23 वर्षीय पायलट लाइट स्पोर्ट्स एयरक्राफ्ट (Light Sports Aircraft- LSA) में अटलांटिक महासागर को पार करने वाली दुनिया की पहली महिला बन गई हैं।
  • यह कैप्टन आरोही की ग्लोबल सर्कमनेविगेशन फ्लाइट (Global Circumnavigation Flight) योजना का हिस्सा है, जिसे उन्होंने अपनी दोस्त केथर मिसक्वेटा के साथ एक साल पहले, 30 जुलाई, 2018 को लॉन्च किया था।
  • वह 1947 के बाद पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में लाइट स्पोर्ट्स एयरक्राफ्ट जहाज़ लैंड कराने वाली पहली नागरिक बनीं।

मारियाना गर्त

हाल ही में अमेरिका के एक अंडर-सी एक्सप्लोरर (Under-sea Explorer), विक्टर वेस्कोवो ने प्रशांत महासागर के मारियाना गर्त (Mariana Trench) में लगभग 6.8 मील तक गोता लगाया। गौरतलब है कि यह पृथ्वी पर सबसे गहरी जगह है।
  • विक्टर वेस्कोवो (Victor Vescovo) ने 1960 का रिकॉर्ड तोड़ते हुए उससे 52 फीट (16 मीटर) नीचे तक गोता लगाया।
  • यह तीसरी बार है जब इंसान ने समुद्र में सबसे अधिक गहराई तक गोता लगाया है, ध्यातव्य है कि इस गहराई को चैलेंजर डीप (Challenger Deep) के नाम से जाना जाता है।
डीएसवी लिमिटिंग फैक्टर
  • डीएसवी लिमिटिंग फैक्टर (DSV limiting Factor) दो लोगों हेतु ‘डीप सी व्हीकल’ (Deep Sea Vehicle-DSV) पोत है, जो महासागर में पूरी गहराई तक गोता लगाने में सक्षम है।
निष्कर्ष
  • विक्टर वेस्कोवो ने समुद्री जीवन की अनदेखी प्रजातियों की खोज की, जिसमें झींगे जैसे लंबे पैर और एंटीना वाले आर्थोपोडा से लेकर समुद्री सूअर जैसे जीव शामिल हैं। उन्होंने धातु या प्लास्टिक की मुद्रित वस्तुएँ भी देखी।
  • संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, दुनिया के महासागरों में लगभग 100 मिलियन टन प्लास्टिक कचरा पहुँच गया है।
  • वैज्ञानिकों ने व्हेल जैसे गहरे आवास वाले समुद्री स्तनधारियों की आंतों में बड़ी मात्रा में माइक्रोप्लास्टिक पाया है।

प्रीलिम्स फैक्ट्स: 16 मई, 2019

वॉयनिक पांडुलिपि

हाल ही में यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिस्टल (University of Bristol) के एक शोधकर्त्ता जेरार्ड चेशायर ने वॉयनिक में लिखी गई एक 600 साल पुरानी पांडुलिपि की भाषा का अर्थ खोजने में सफलता प्राप्त की।
  • जेरार्ड चेशायर ने वॉयनिक को प्राचीन-रोमन भाषा का एकमात्र ज्ञात उदाहरण होने का दावा किया है।
  • भूमध्यसागरीय क्षेत्र में मध्यकाल के दौरान इस भाषा का इस्तेमाल व्यापक था किंतु आधिकारिक या महत्त्वपूर्ण दस्तावेज़ों को लिखने में शायद ही कभी इस भाषा का इस्तेमाल किया गया क्योंकि लैटिन राजसी गौरव, चर्च और सरकार की भाषा थी। नतीजतन, यह प्राचीन-रोमन भाषा धीरे-धीरे खत्म हो गई।
  • प्राप्त की गई वॉयनिक पांडुलिपि 15वीं शताब्दी (1404-38) की है। यह पांडुलिपि वेल्लम (एक प्रकार का चर्मपत्र जिसे भेड़ के बच्चे, बकरी या बछड़े की त्वचा से बनाया गया है) पर टेक्स्ट और चित्र के साथ लिखी गई है।
  • इस पांडुलिपि को डोमिनिकन ननों द्वारा मारिया केस्टाइल (क्वीन्स ऑफ एरागोन, स्पेन में एक स्वायत्त समुदाय) के संदर्भ स्रोत के रूप में संकलित किया गया था।

स्पैरो

स्पैरो स्मार्ट परफॉरमेंस अपरेज़ल रिपोर्ट रिकॉर्डिंग ऑनलाइन विंडो (Smart Performance Appraisal Report Recording Online Window- SPARROW) का संक्षिप्त रूप है।
  • इसके तहत एनुअल परफॉरमेंस अपरेज़ल रिपोर्ट (APAR) को इंटरनेट के माध्यम से दर्ज़ किया जाएगा।
  • इसे समूह बी और समूह सी के 46,000 अधिकारियों (केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड) के लिये पूरे देश में लॉन्च किया गया है।
  • भारतीय राजस्व सेवाओं (C और CE) के अधिकारियों के लिये स्पैरो (SPARROW) में ‘एनुअल परफॉरमेंस अपरेज़ल रिपोर्ट’ को इंटरनेट के माध्यम से पहले से ही लागू किया जा चुका है जो 2016-2017 से प्रभावी है।
  • यह सरकारी नौकरियों में पदोन्नति और पोस्टिंग में पारदर्शिता तथा सुशासन सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम होगा। 

प्रीलिम्स फैक्ट्स: 17 मई, 2019

ससकावा पुरस्कार 2019

हाल ही में आपदा जोखिम न्यूनीकरण संयुक्त राष्ट्र कार्यालय (United Nations Office for Disaster Risk Reduction-UNDRR) ने प्रमोद कुमार मिश्रा को आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिये ससकावा पुरस्कार 2019 से सम्मानित किया है।
  • श्री मिश्रा ने आपदा से प्रभावित समुदायों की समस्याओं का सामना करने हेतु उनकी क्षमता में आवश्यक सुधार के लिये लंबे समय तक मदद की।
  • उन्होंने सामाजिक समावेशन के महत्त्वपूर्ण सिद्धांत का अनुपालन करते हुए सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों की स्थिति में सुधार हेतु असमानता तथा गरीबी को कम करने कि दिशा में सराहनीय कार्य किया।
ससकावा पुरस्कार के बारे में
  • संयुक्त राष्ट्र का यह पुरस्कार किसी ऐसे व्यक्ति/संस्थान को दिया जाता है, जो अपने समुदाय के बीच आपदा जोखिम न्यूनीकरण में सक्रिय भूमिका निभाने के साथ ही इसका पक्षधर भी हो।
  • जिनेवा में ग्लोबल प्लेटफॉर्म फॉर डिजास्टर रिस्क रिडक्शन (Global Platform for Disaster Risk Reduction- GPDRR) 2019 के छठे सत्र में इस पुरस्कार की घोषणा की गई।
  • वर्ष 2019 के लिये ससकावा पुरस्कार की थीम ‘बिल्डिंग इनक्लूसिव एंड रेजिलिएंट सोसाइटीज़’ (Building Inclusive and Resilient Societies) थी।

कलमकारी

कलमकारी आंध्र प्रदेश में प्रचलित एक हस्तकला है जिसमें रंगीन ब्लॉक या हाथ से सूती कपड़े पर चित्रकारी की जाती है।
  • कलमकारी चित्रकला में आमतौर पर एक तेज़, नुकीले छेद वाली बाँस की कलम का उपयोग करते हुए सूती कपड़ों को चित्रित किया जाता है। बाँस की कलम कपड़े पर रंग के प्रवाह को नियंत्रित करती है।
  • कलमकारी नाम की उत्पत्ति दो फारसी शब्दों ‘कलम’ और ‘कारी’ से हुई है जिनका अर्थ क्रमशः कलम तथा शिल्प/कौशल होता है।
  • रामायण और महाभारत जैसे महाकाव्यों के पौराणिक चरित्रों को चित्रित करने के लिये कलमकारी चित्रकला को एक जीवंत और अद्वितीय माध्यम माना जाता है।
  • भारत में कलमकारी के दो रूप विकसित हुए हैं। जो इस प्रकार हैं-
  • मछलीपट्नम कलमकारी (Machilipatnam style- Krishna district)
  • श्रीकलाहस्ति कलमकारी (Srikalahasti style- Chittoor district)
  • कलमकारी की मछलीपट्नम शैली में मूल रूप से नक्काशे गए पारंपरिक ब्लॉकों पर हाथों से चित्रकारी की जाती है।
  • चित्रकला की श्रीकलाहस्ती शैली में हिंदू पौराणिक कथाओं से प्रेरणा लेकर महाकाव्यों और लोककथाओं के दृश्यों का वर्णन किया जाता है।

शेषचलम जैवमंडल रिज़र्व

गर्मी के बढ़ते प्रकोप की वज़ह से शेषचलम जैवमंडल रिज़र्व के जानवर प्यास बुझाने के लिये जंगल से लगे गाँवों की तरफ बढ़ रहे हैं।
  • वन अधिकारियों ने पाया कि स्लेंडर लोरिस (Slender Loris) और पैंगोलिन जैसी शांत स्वभाव और लुप्तप्राय प्रजातियाँ भी इंसानी बस्तियों की तरफ बढ़ रही हैं।
  • शेषचलम पहाड़ी यानी आंध्र प्रदेश का पहला जैवमंडल रिज़र्व, चित्तूर और कडप्पा ज़िलों के दक्षिण-पूर्वी घाटों में स्थित है।
  • इसे 2010 में भारत के जैवमंडल रिज़र्व के रूप में नामित किया गया था।
  • यह जैवमंडल रिज़र्व वानस्पतिक रूप से समृद्ध है और इसमें स्थानिक और दुर्लभ वनस्पतियाँ भी पाई जाती हैं।

विश्व उच्च रक्तचाप दिवस

हर साल 17 मई को ‘विश्व उच्च रक्तचाप दिवस’ (World Hypertension Day) मनाया जाता है। गौरतलब है कि इस दिवस का उद्देश्य उच्च रक्तचाप के बारे में जागरूकता फैलाने और लोगों को इस मूक हत्यारे को नियंत्रित करने के लिये प्रोत्साहित करना है।
  • इस वर्ष ‘विश्व उच्च रक्तचाप दिवस’ की थीम ‘नो योर नंबर्स’ (Know Your Numbers) है।
  • उच्च रक्तचाप दुनिया भर में मृत्यु की एक बड़ी वज़ह है जिसे रोका जा सकता है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (National Family Health Survey) के अनुसार, 2017 में पूरे भारत में 22.5 मिलियन लोगों की जाँच में पाया गया कि हर आठ में से एक भारतीय उच्च रक्तचाप से पीड़ित है।
उच्च रक्तचाप
  • उच्च रक्तचाप या हाइपरटेंशन तब होता है जब किसी व्यक्ति की धमनी का रक्तचाप एक निश्चित स्तर से ऊपर उठ जाता है। इसे आमतौर पर ब्लडप्रेशर के रूप में भी जाना जाता है।
  • उच्च रक्तचाप होने का सीधा मतलब यह है कि पूरे शरीर में रक्त की आपूर्ति करने के लिये हृदय को सामान्य से अधिक पंप करना पड़ता है।
  • उच्च रक्तचाप को अक्सर ‘साइलेंट किलर’ कहा जाता है क्योंकि जब तक शरीर के अंग गंभीर रूप से प्रभावित न हों तब तब इसका कोई लक्षण परिलक्षित नहीं होता है।

स्टारलिंक

  • स्टारलिंक स्पेसएक्स की एक परियोजना है जिसके तहत परिक्रमा करते हुए अंतरिक्षयानों के क्लस्टर के साथ ब्रॉडबैंड नेटवर्क बनाए जाने की योजना है।
  • यह एक नए फ्लैट-पैनल डिज़ाइन पर आधारित होगा, जिसमें क्रिप्टन-ईंधन प्लाज़्मा थ्रस्टर्स, उच्च-शक्ति एंटीना और अंतरिक्ष में अन्य वस्तुओं से स्वतः दूर जाने की क्षमता होगी।
  • स्पेसएक्स के अनुसार, फाल्कन-9 रॉकेट की सहायता से 60 उपग्रहों का पेलोड प्रक्षेपित किया जाएगा जिसका वज़न 15 टन (13,620 किलोग्राम) होगा।

प्रीलिम्स फैक्ट्स: 18 मई, 2019

माउंट मकालू

माउंट मकालू दुनिया की पाँचवी सबसे ऊँची चोटी है जिसकी ऊँचाई 8485 मीटर है। यह नेपाल-तिब्बत (चीन) सीमा पर हिमालय में स्थित है।
  • इस चोटी को दुनिया की सबसे खतरनाक पर्वत चोटियों में से एक माना जाता है और मौसम की दुरूह परिस्थितियों तथा हाड़ कंपा देने वाली ठंड के कारण इस चोटी पर चढ़ना बेहद चुनौतीपूर्ण समझा जाता है।
  • यह पर्वत चोटी पर्वतारोहियों की तकनीकी सूझ-बूझ, मानसिक और शारीरिक साहस तथा माउंट मकालू के शिखर तक पहुँचने के उनके संकल्‍प की परीक्षा लेती है।
  • यह पिरामिड के आकार का पर्वत है जो माउंट एवरेस्ट से लगभग 20 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में स्थित है।
  • मकालू नाम संस्कृत शब्द ‘महाकाल’ से लिया गया है, जो हिंदू देवता शिव का एक नाम है। चीन में इस चोटी को मकारू नाम से जाना जाता है।

मकालू-बारुण राष्ट्रीय उद्यान

माउंट मकालू नेपाल के मकालू-बारुण राष्ट्रीय उद्यान और संरक्षण क्षेत्र में स्थित है, यह 580 वर्ग मील का एक पार्कलैंड है जो 13,000 फीट से ऊपर के उष्णकटिबंधीय वर्षावनों से लेकर अल्पाइन टुंड्रा तक प्राचीन पारिस्थितिकी प्रणालियों की रक्षा करता है।
  • वनस्पति विज्ञानियों ने फूलों की 3,128 प्रजातियों की पहचान की है जिनमें रोडोडेंड्रोन (बुरांश के फूल) की 25 प्रजातियाँ शामिल हैं।
  • 440 से अधिक पक्षी प्रजातियों और 88 स्तनपायी प्रजातियों के साथ कई अन्य जानवर भी यहाँ पाए जाते हैं जिसमें लाल पांडा, हिम तेंदुआ और दुर्लभ एशियाई गोल्डन कैट भी शामिल हैं।

राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यकम

हाल ही में राजस्थान सरकार ने राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य केंद्र, उजाला क्लीनिक (किशोर हितैषी स्वास्थ्य क्लीनिक) को फिर से शुरू करने का फैसला किया है।
‘राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यकम’
  • राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम (Rashtriya Kishor Swasthya Karyakram-RKSK)  स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा 7 जनवरी, 2014 को 10-19 वर्ष की आयु वर्ग के किशोरों के लिये शुरू किया गया यह स्वास्थ्य कार्यक्रम अन्य मुद्दों के अलावा पोषण, प्रजनन स्वास्थ्य और मादक द्रव्यों के सेवन को लक्षित करेगा।
  • इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किशोर भागीदारी और नेतृत्व, समता तथा समावेशन, लैंगिक समानता एवं अन्य क्षेत्रों व हितधारकों के साथ सामरिक भागीदारी है।
  • इसके तहत किशोरों में मानसिक स्वास्थ्य, पोषण, गैर-संचारी रोग, लिंग आधारित हिंसा और मादक पदार्थों के सेवन की रोकथाम पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
  • इस कार्यक्रम के कार्यान्वयन संबंधी मार्गदर्शन करने के लिये संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (United Nations Population Fund- UNFPA) के सहयोग से स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (Ministry of Health and Family Welfare- MoHFW) ने एक राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य रणनीति विकसित की है।
  • राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम पोषण, यौन प्रजनन स्वास्थ्य, पदार्थों का दुरुपयोग, गैर-संचारी रोग, मानसिक स्वास्थ्य, चोट और हिंसापर ध्यान केंद्रित करता है।
  • इस कार्यक्रम के प्रमुख कार्यों में काउंसलर द्वारा मदद, सुविधा-आधारित परामर्श, सामाजिक और व्यवहार परिवर्तन, संचार, देखभाल के स्तरों पर किशोर अनुकूल स्वास्थ्य क्लिनिक (Adolescent Friendly Health Clinics- AFHC) को मजबूत बनाने जैसे समुदाय-आधारित हस्तक्षेप शामिल हैं।

मिलिट्री नर्सिंग सर्विस

हाल ही में रक्षा मंत्रालय और सेना ने मिलिट्री नर्सिंग सर्विस (Military Nursing Service- MNS) कैडर को पूर्व सैनिकों का दर्जा देने के लिये सैद्धांतिक सहमति दे दी है।
पूर्व सैनिक का दर्जा प्राप्त करने के बाद सेवानिवृत्त मिलिट्री नर्सिंग सर्विस के अधिकारी पहचान पत्र प्राप्त करने, सरकारी संगठनों/सार्वजनिक उपक्रमों में पुन: रोज़गार पाने और सशस्त्र बलों की विभिन्न पुनर्वास योजनाओं हेतु आवेदन करने में सक्षम होंगे।
मिलिट्री नर्सिंग सर्विस की स्थापना 1943 में एक सहायक बल के रूप में की गई थी और इसमें केवल महिला अधिकारी होती हैं। गौरतलब है मिलिट्री नर्सिंग सर्विस तीनों सेनाओं में नर्सिंग स्टाफ के रूप में काम करती है।
· यह सशस्त्र बलों में एकमात्र ऐसी वाहिनी है जिसमें केवल महिलाएँ हैं।

ताइवान में समलैंगिक विवाह को मंज़ूरी

हाल ही में ताइवान ने एक विधेयक पारित करते हुए समलैंगिक विवाह को मंज़ूरी दे दी है। गौरतलब है कि ताइवान समलैंगिक विवाह की अनुमति देने वाला पहला एशियाई देश बन गया है।
  • ताईवान संसद द्वारा पारित यह विधेयक समलैंगिक जोड़ों को भी पुरुष-महिला विवाहित जोड़ों की भाँति ही सुविधाएँ प्रदान करेगा।
  • भारत में सर्वोच्च न्यायालय ने वर्ष 2018 में भारतीय दंड संहिता की धारा 377 के कुछ प्रावधानों को खत्म करते हुए समलैंगिकता को अपराध के दायरे से बाहर कर दिया था।

विषय से संबंधित कुछ महत्त्वपूर्ण परिभाषाएँ
द्विलैंगिक (Bisexual) - वे जो महिला और पुरुष दोनों के प्रति आकर्षित हों।
विषमलैंगिक (Heterosexual) - वे जो केवल विपरीत लिंग की ओर आकर्षित हों।
समलैंगिक - वे लोग जो अपने ही लिंग के किसी दूसरे व्यक्ति के प्रति आकर्षित हों।
लेस्बियन (Lesbian)- वे महिलाएँ जो महिलाओं के प्रति आकर्षित हों।
गे (Gay)- वे पुरुष जो दूसरे पुरुष के प्रति आकर्षित हों।
एल.जी.बी.टी. (LGBT) - लेस्बियन, गे, बाइसेक्सुअल और ट्रांसजेंडर्ड।
क्वीयर (Quier)- एक ऐसा शब्द जिसमें वे सभी लोग व नज़रिये शामिल हैं, जो मुख्यधाारा द्वारा मान्य जेंडर और यौनिकता की परिभाषा को चुनौती देते हैं।

प्रीलिम्स फैक्ट्स: 20 मई, 2019

SIMBEX 2019

भारत और सिंगापुर के बीच SIMBEX-2019 युद्ध अभ्यास की शुरुआत दक्षिणी चीन सागर में हो चुकी है। गौरतलब है कि SIMBEX-2019 इस वार्षिक अभ्यास का 26वाँ संस्करण है।
  • इस अभ्यास का आयोजन 16-22 मई,  2019 के बीच किया जा रहा है।
  • भारतीय नौसेना के जहाज़ कोलकाता और शक्ति के अतिरिक्‍त लंबी दूरी के सामुद्रिक निगरानी विमान भी सिम्‍बेक्‍स-19 में हिस्‍सा ले रहे हैं।
  • इस द्विपक्षीय अभ्‍यास की शुरुआत पारंपरिक पनडुब्‍बी-रोधी अभ्‍यासों से हुई जो एडवांस्‍ड ए‍यर डिफेंस ऑपरेशन्‍स (Advanced Air Defense Operations), एंटी एयर/सरफेस टारगेट्स पर अभ्‍यास गोलीबारी (Exercise Firing on Anti Air/Surface Targets), सामरिक अभ्‍यास आदि तक पहुँच चुकी है।
  • वर्ष 2018 में इस अभ्यास का आयोजन अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह के बाहर हिंद महासागर में किया गया था।
भारत-सिंगापुर संबंध के बारे में अधिक जानकारी के लिये नीचे दिये गए लिंक पर क्लिक कीजिये-

फल खाने वाले पक्षियों का सर्वेक्षण

हाल ही में नेचर कंज़र्वेशन फाउंडेशन (Nature Conservation Foundation) ने फल खाने वाले अलग-अलग पक्षियों और उनकी पारस्परिक क्रियाओं का चित्रण किया है जो वन्य पारिस्थितिकी तंत्र के लिये महत्त्वपूर्ण है।
  • यह अध्ययन अरुणाचल प्रदेश में पक्के टाइगर रिज़र्व में किया गया जिसमें वृक्षों की 43 प्रजातियाँ और उन वृक्षों के फलों को खाने वाले पक्षियों (फल खाने वाले) की 48 प्रजातियाँ शामिल थीं।
  • वृक्षों को उनके बीज के आकार के अनुसार वर्गीकृत किया गया था।
  • अध्ययन में पाया गया कि बड़े बीज वाले वृक्ष अपने फैलाव के लिये मुख्य रूप से हॉर्नबिल और इम्पीरियल पिजन पर, जबकि मध्यम आकार के बीज वाले वृक्ष बुलबुल, बारबेट्स के साथ-साथ हॉर्नबिल और इम्पीरियल पिजन पर निर्भर होते हैं।
  • अध्ययन के अनुसार, किसी क्षेत्र में हार्नबिल की संख्या में कमी आने पर उस क्षेत्र विशेष में पौधों का पुनर्जनन भी बड़े पैमाने पर प्रभावित होता है।
नेचर कंज़र्वेशन फाउंडेशन
  • नेचर कंजर्वेशन फाउंडेशन मैसूर में स्थित एक गैर-सरकारी वन्यजीव संरक्षण और अनुसंधान संगठन है।

भारत में उपलब्ध ग्रेफाइट भंडार

  • अरुणाचल प्रदेश सरकार ने भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण विभाग (Geological Survey of India-GSI) से  इस संभावना का पता लगाने को कहा है जिससे भारत-चीन सीमा से लगे स्थानों पर खनिज की उपलब्धता की पुष्टि हो सके, ताकि इन खनिज स्थलों का पूर्ण रूप से सर्वेक्षण कर खनन (Drilling) कार्य शुरू किया जा सके। अरुणाचल प्रदेश सरकार का यह कदम चीन की उस कार्यवाही की प्रतिक्रिया माना जा रहा है जिसके अंतर्गत चीन तिब्बत में वृहद् पैमाने पर खनन गतिविधि को बढ़ावा दे रहा है।
  • GSI के अनुसार, भारत में पाए जाने वाले कुल ग्रेफाइट का लगभग 35% अरुणाचल प्रदेश में पाया जाता है। अरुणाचल प्रदेश में देश का सबसे अधिक ग्रेफाइट पाया जाता है।
  • GSI की वर्ष 2013 की रिपोर्ट के अनुसार, अरुणाचल प्रदेश में 43% ग्रेफाइट, जम्मू-कश्मीर में 37%, झारखंड में 6%, तमिलनाडु में 5% और ओडिशा में 3% ग्रेफाइट संसाधनों की उपलब्धता है।
  • संसाधनों के आधार पर राज्यों की भंडार प्रतिशतता की बात की जाए तो तमिलनाडु के पास 37%, झारखंड के पास 30% और ओडिशा के पास 29% संसाधनों की उपलब्धता है।
ग्रेफाइट
  • ग्रेफाइट प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले क्रिस्टलीय कार्बन का एक रूप है।
  • यह एक प्राकृतिक खनिज तत्त्व है जो रूपांतरित और आग्नेय चट्टानों में पाया जाता है।
  • इसकी संरचना स्तरीय प्रकार की होती है जिसमें छह कार्बन परमाणुओं के छल्ले होते हैं। ये छल्ले व्यापक रूप से क्षैतिज स्थिति में व्यवस्थित होते हैं।
  • ये रंग में गहरे भूरे और काले तथा अपारदर्शी एवं बहुत मुलायम होते हैं।
  • यह एकमात्र अधात्विक तत्त्व है जो विद्युत् का एक अच्छा चालक होता है।
  • मुलायम प्रकृति का होने के कारण इसे एक शुष्क स्नेहक के रूप में जाना जाता है।
  • इसके कई औद्योगिक उपयोग हैं और विशिष्ट तौर पर ऐसे उत्पादों के लिये इसका उपयोग किया जाता है जिन्हें बहुत अधिक गर्मी की आवश्यकता होती है।
भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण विभाग
  • मुख्य रूप से रेलवे के लिये भारत में उपलब्ध कोयला भण्डार की खोज के उद्देश्य से वर्ष 1851 में भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (Geological Survey of India-GSI) विभाग की स्थापना की गई थी।
  • इन वर्षों में यह संस्था न केवल देश में विभिन्न क्षेत्रों के लिये आवश्यक भू-विज्ञान सूचनाओं के भंडार के रूप में विकसित हुई, बल्कि इसने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान को स्थापित करते हुए भू-वैज्ञानिक संगठन का दर्जा भी प्राप्त किया।
  • GSI का मुख्य कार्य राष्ट्रीय भू-वैज्ञानिक सूचना और खनिज संसाधन मूल्यांकन और आधुनिकीकरण संबंधी कार्य करना है।
  • इसका मुख्यालय कोलकाता में है और देश के लगभग सभी राज्यों में राज्य इकाई कार्यालय तथा लखनऊ, जयपुर, नागपुर, हैदराबाद, शिलांग और कोलकाता में इसके छह क्षेत्रीय कार्यालय अवस्थित हैं।
  • वर्तमान में GSI खान मंत्रालय की एक सहायक संस्था के रूप में कार्य कर रहा है।

प्रीलिम्स फैक्ट्स: 21 मई, 2019

वयोश्रेष्ठ सम्मान

वयोश्रेष्ठ सम्मान वरिष्‍ठ नागरिकों की सराहनीय सेवा करने वाले संस्‍थानों और वरिष्‍ठ नागरिकों को उनकी उत्तम सेवाओं तथा उपलब्धियों के सम्‍मान स्‍वरूप प्रदान किया जाता हैं।
  • वयोश्रेष्ठ सम्मान हर साल 1 अक्तूबर को मनाए जाने वाले अंतर्राष्ट्रीय वृद्ध दिवस (International Day of Older Person) की पूर्व संध्या पर वितरित किये जाते हैं।
संयुक्त राष्ट्र महासभा ने अंतर्राष्ट्रीय वृद्ध दिवस को मनाने के लिये 1 अक्तूबर, 1999 को एक प्रस्ताव अपनाया था।
  • वर्ष 2013 से 13 विभिन्‍न श्रेणियों में वयोश्रेष्‍ठ सम्‍मान प्रदान किया जाता है।
  • वयोश्रेष्‍ठ सम्‍मान की स्‍थापना सामाजिक न्‍याय और अधिकारिता मंत्रालय ने वर्ष 2005 में की थी और इसे वर्ष 2013 में राष्‍ट्रीय पुरस्‍कारों की श्रेणी में लाया गया।
  • यह युवा पीढ़ी को समाज और राष्ट्र के निर्माण में बुज़ुर्गों के योगदान को समझने का अवसर भी प्रदान करता है।
  • इस पुरस्‍कार के लिये भारत सरकार के मंत्रालयों/विभागों और उनके स्वायत्त संगठनों से नामांकन आमंत्रित किये जाते हैं।

माउंट टेंचेंखांग

हाल ही में माउंट टेंचेंखांग (Mount Tenchenkhang) के पर्वतारोहण अभियान के लिये एनसीसी की 20 महिला कैडेट्स की एक टीम को रवाना की गई है।
  • माउंट टेंचेंखांग (6010 मी.) पश्चिमी सिक्किम में स्थित है और कंचनजंगा राष्ट्रीय उद्यान के अंतर्गत आता है जो प्राकृतिक सुंदरता, जैव-विविधता, झीलों तथा बर्फ से ढके पहाड़ों के लिये जाना जाता है।
कंचनजंगा राष्ट्रीय उद्यान
  • कंचनजंगा राष्ट्रीय उद्यान सिक्किम में स्थित एक राष्ट्रीय उद्यान और जैवमंडल रिज़र्व है। इसे जुलाई 2016 में यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थलों की सूची में शामिल किया गया था, जो भारत का पहला और एकमात्र ‘मिश्रित धरोहर’ स्थल है।
  • यह ‘यूनेस्को मैन एंड बायोस्फीयर प्रोग्राम’ (UNESCO Man and the Biosphere Programme) में शामिल है। इस उद्यान का नाम कंचनजंगा पर्वत से लिया गया है, जो 8,586 मीटर लंबा (दुनिया की तीसरी सबसे ऊँची चोटी) है। इस उद्यान का कुल क्षेत्रफल 849.5 वर्ग किमी. है।

ओंगोल नस्ल की गाय

हाल ही में भारत के उपराष्ट्रपति ने विजयवाड़ा स्थित स्वर्ण भारत न्यास में आयोजित एक कार्यक्रम में ओंगोल नस्ल की गाय (Ongole Cattle Breed) पर एक विवरणिका जारी की। यह विवरणिका 1200 पन्नों की है जिसमें वर्ष 1885 से 2016 तक पशुओं का इतिहास दिया गया है।
  • इस पुस्तक में ओंगोल गाय पर किये जाने वाले अनुसंधान को भी शामिल किया गया है।
  • ओंगोले नस्ल का नामकरण आंध्र प्रदेश के भौगोलिक क्षेत्र ओंगोल के नाम पर किया गया है।
  • इसे नेल्लोर नस्ल भी कहा जाता है क्योंकि पूर्व में ओंगोल तालुक नेल्लोर ज़िले का हिस्सा था, लेकिन अब यह गुंटूर ज़िले में शामिल है।
  • यह नस्ल मूल रूप से आंध्र प्रदेश के तटीय ज़िलों- गुंटूर, प्रकाशम और नेल्लोर में पाई जाती है।
  • यह ऐसी नस्ल है, जिसे दूध के उत्पादन के साथ-साथ खेतों की जुताई में भी उपयोग किया जा सकता है।

शिक्षकों की निगरानी हेतु कॉल सेंटर

गुजरात सरकार ने रियल टाइम प्रोद्यौगिकी का प्रयोग करते हुए विद्यालयों में शिक्षकों की निगरानी हेतु एक नई योजना बनाई है जो जून में शुरू होने वाले नए शैक्षिक-सत्र से लागू हो जाएगी।
  • इस योजना का उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता को सुधारने का प्रयास करना है जिसके अंतर्गत यह पता लगाना होगा कि विद्यालय परिसर में शिक्षक अपने कर्त्तव्यों का वहन उचित ढंग से कर रहे हैं या नहीं।
  • इस प्रक्रिया के संचालन हेतु एक कमान एवं नियंत्रण केंद्र (Command and Control Centre) की स्थापना की गई है जो गांधीनगर में स्थित है।
  • केवल शिक्षक ही नहीं, शिक्षकों की निगरानी करने वाले कर्मियों को भी निगरानी हेतु जीपीएस-सक्षम टैबलेट (GPS-enabled Tablets) सौंपे जाएंगे और जियोफेंसिंग (Geofencing) के माध्यम से शिक्षकों की ट्रैकिंग की जा सकेगी तथा मोबाइल डिवाइस में एक निर्दिष्ट क्षेत्र में प्रवेश करने या उस क्षेत्र को छोड़ने पर अलर्ट प्राप्त होगा।
  • इस कॉल सेंटर के अधिकारी किसी भी शिक्षक से सवाल कर सकते हैं; ये प्रश्न उनके प्रतिदिन के कार्य या असाइनमेंट से संबंधित हो सकते हैं।
  • छुट्टी पर रहने की स्थिति में उन्हें छुट्टी का विवरण प्रदान करना होगा, जिसमें दिनों की संख्या और अनुमोदन प्राधिकारी जैसी जानकारी शामिल होगी।
  • अधिकारियों के अनुसार, इस नए ट्रैकिंग सिस्टम का शिक्षकों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। उनकी उपस्थिति और असाइनमेंट के अलावा, नई पठन-पाठन प्रणाली तथा नवाचार से संबंधित सुझाव भी मांगे जाएंगे और उन्हें रिकॉर्ड किया जाएगा।

प्रीलिम्स फैक्ट्स: 22 मई, 2019

काले धन से संबंधित कानून भूतलक्षी प्रभाव से लागू होंगे

सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court-SC) ने हाल ही में दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा काला धन (अघोषित विदेशी आय और संपत्ति) कर अधिरोपण अधिनियम [Black Money (Undisclosed Foreign Income and Assets) and Imposition of Tax Act] पर लगाई गई रोक को हटा दिया गया है। इसी के साथ अघोषित विदेशी आय एवं संपत्ति कर अधिरोपण अधिनियम, 2015 के भूतलक्षी प्रभाव/बैक डेट से आरोपियों के खिलाफ कार्यवाही करने की स्थिति बहाल हो जाएगी।
प्रमुख बिंदु
  • दिल्ली उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा था कि 2016 का काला धन कानून के तहत जुलाई 2015 से भूतलक्षी प्रभाव (Retrospective Effect) के साथ अपराधियों को आरोपी बनाने और उनकी जाँच हेतु कार्यवाही करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है।
  • इस अधिनियम को वर्ष 2015 में अधिनियमित किया गया था। इस अधिनियम में यह स्पष्ट किया गया था कि यह अधिनियम 1अप्रैल, 2016 से लागू होगा।
  • हालाँकि 1 जुलाई, 2015 को सरकार द्वारा अधिनियम की धारा 86 (मतभेदों को दूर करने की शक्ति) के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग करने के लिये एक अधिसूचना जारी की, जिसमें अधिनियम को लागू करने की पूर्वनिर्धारित तिथि को बदलकर 1 जुलाई, 2015  कर दिया गया था।
  • इस अधिनियम में  भारतीय निवासियों को अपनी अघोषित विदेशी आय और संपत्ति को घोषित करने का एक अवसर देने का प्रावधान किया गया था।
काला धन (अघोषित विदेशी आय और संपत्ति) एवं कर अधिरोपण अधिनियम, 2015 का प्रभाव Black Money (Undisclosed Foreign Income and Assets) and Imposition of Tax Act
  • यह विदेशी आय को छिपाने के लिये दंड का प्रावधान करता है और विदेशी आय के संबंध में कर से बचने के प्रयास को आपराधिक दायित्व के दायरे में शामिल करता है।
  • यदि किसी व्यक्ति के पास अघोषित विदेशी संपत्ति होने का प्रत्यक्ष प्रमाण प्राप्त होता है तो संबंधित व्यक्ति को 30% की दर से कर का भुगतान और इसी के बराबर दंड राशि का भुगतान करना पड़ता था।
  • इसके इतर संपत्ति को घोषित न करने के मामले में 30% की दर से कर अधिरोपण के साथ-साथ छिपाये गए कर की राशि की तीन गुना राशि का भुगतान या अघोषित आय के 90% भाग या परिसंपत्ति के मूल्य का भुगतान का प्रावधान किया गया है।
  • अधिनियम में जानबुझकर की गई कर चोरी के लिये 3-10 साल की जेल की सजा का प्रावधान है।
  • इस अधिनियम में विदेशों में अर्जित परिसंपत्तियों की घोषणा करने के लिये एकमुश्त अनुपालन विंडो उपलब्ध कराने और इस प्रकार घोषित परिसंपत्तयों के मूल्य पर निर्धारित कर और जुर्माने का भुगतान करने का प्रावधान है।

वेस्ट नील वायरस

हाल ही में केरल के मलप्पुरम और कोझिकोड ज़िलों में वेस्ट नील वायरस के कारण संक्रमण फैलने के कई  मामले सामने आए हैं। इसके कारण राज्य के स्वास्थ्य विभाग को इस क्षेत्र में वेस्ट नील फीवर और संक्रमण के स्रोत के विषय में जानकारी प्राप्त करना कठिन हो गया है।
  • आमतौर पर वेस्ट नील वायरस (West Nile Virus-WNV) अफ्रीका, यूरोप, मध्य पूर्व, उत्तरी अमेरिका और पश्चिम एशिया में पाया जाता है, यह विषाणु/वायरस जनित संक्रमण के लिये उत्तरदायी है।
  • यह आमतौर पर मच्छरों द्वारा फैलता है और लोगों में तंत्रिका/स्नायु (Neurological) संबंधी बीमारी के साथ-साथ मृत्यु का कारण भी बन सकता है।
  • वर्ष 1937 में पहली बार एक माहिला में इस बीमारी की पहचान की गई थी जो पश्चिमी नील नदी के युगांडा ज़िले की निवासी थी, एक बार फिर से इस बीमारी को नील नदी क्षेत्र के पक्षियों में ही देखा गया है।
  • इस विषाणु (Virus) को मनुष्यों और जानवरों में इंजेक्ट किया जा सकता है (अथवा प्रवेश कराया जा सकता है) तथा अन्य संक्रमित जानवरों, उनके रक्त या ऊतकों के संपर्क में आने से भी यह संचरित हो सकता है।
  • कुछ दुर्लभ मामलों में इस संक्रमण के अंग प्रत्यारोपण, रक्त संचारण (Blood Transfusion) और स्तनपान के माध्यम से फैलने के मामले भी सामने आए हैं।
  • अभी तक मानव से मानव के संक्रमित होने की घटना देखने को नहीं मिली है।
  • WHO के अनुसार, संबंधित बीमारी के लक्षण या तो पकड़ में ही नहीं आ रहे है या 80% संक्रमित लोगों में यह संक्रमण गंभीर वेस्ट नील के बुखार के रूप में व्याप्त  हैं।

जोको विदोदो- इंडोनेशिया के नए राष्ट्रपति

  • जोको विदोदो (Joko widodo) इंडोनेशिया के राष्ट्रपति के तौर पर पुनर्निर्वाचित हुए हैं। इन्होनें अपने पूर्ववर्ती जनरल प्राबोवो सुबीआंतो (Prabowo Subianto) को हराकर दोबारा सत्ता ग्रहण की है।
  • जोको विदोदो वर्ष 2014 से इंडोनेशिया के राष्ट्रपति है,  चुनाव प्रचारों के दौरान उन्होंने स्वयं को जनता के नेता (Man of the people) के तौर पर प्रचारित किया।
इंडोनेशिया (Indonesia)
  • यह एक द्वीपसमूह है जो भूमध्य रेखा के पार स्थित है।
  • इंडोनेशिया दक्षिण पूर्व एशिया का सबसे बड़ा देश है। यह बोर्नियो के उत्तरी भाग में मलेशिया के साथ और पापुआ न्यू गिनी में न्यू गिनी (इंडोनेशिया का हिस्सा) के केंद्र में सीमा साझा करता है।
  • इसकी राजधानी जकार्ता (Jakarta), जावा के उत्तर-पश्चिमी तट के समीप स्थित है।
  • यह 80% मुस्लिम आबादी वाला एक मुस्लिम बहुल देश है।

प्रीलिम्स फैक्ट्स: 23 मई, 2019

अंतर्राष्‍ट्रीय जैव-विविधता दिवस

अंतर्राष्‍ट्रीय जैव-विविधता दिवस, जिसे विश्व जैव विविधता दिवस के रूप में भी जाना जाता है, जैव-विविधता को बढ़ावा देने के लिये 22 मई को मनाया जाता है।
  • वर्ष 2019 के लिये अंतर्राष्‍ट्रीय जैव-विविधता दिवस (International Day of Biological Diversity) की थीम ‘हमारी जैव-विविधता, हमारा भोजन, हमारा स्वास्थ्य’ (Our Biodiversity, Our Food, Our Health) है।
  • अंतर्राष्‍ट्रीय जैव-विविधता दिवस को मनाने की शुरुआत 20 दिसंबर, 2000 को संयुक्त राष्ट्र महासभा के प्रस्ताव द्वारा की गई थी।
  • 22 मई, 1992 को नैरोबी में जैव-विविधता पर अभिसमय (Convention on Biological Diversity- CBD) के टेक्स्ट को स्वीकार किया गया था। इसलिये 22 मई को प्रतिवर्ष अंतर्राष्‍ट्रीय जैव-विविधता दिवस मनाया जाता है।
खाद्य और कृषि हेतु जैव विविधता
  • आनुवंशिकी, प्रजातिय और पारिस्थितिकी-तंत्र के स्तर पर जैव-विविधता जीवन की विविधता है। खाद्य और कृषि हेतु जैव विविधता (Biodiversity For Food and Agriculture- BFA) इसी का ही एक हिस्सा है जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कृषि और खाद्य उत्पादन में योगदान देता है।
  • जैव-विविधता, उत्पादन प्रणाली और आजीविका को जलवायु परिवर्तन के कारण होने वाले नुकसान के प्रति अधिक लचीला बनाती है।

ब्रह्मोस का हवाई संस्करण

  • हाल ही में भारतीय वायुसेना (Indian Airforce) ने अपने अग्रिम पंक्ति के एसयू-30 एमकेआई (Su-30 MKI) लड़ाकू विमान से सफलतापूर्वक ब्रह्मोस हवाई प्रक्षेपित मिसाइल का परीक्षण किया है।
  • हवाई प्रक्षेपित 2.5 टन की ब्रह्मोस मिसाइल हवा से जमीन पर मार करने वाली सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल (Cruise Missile) है, जिसकी मारक क्षमता 300 किलोमीटर है।
  • बीएपीएल (BrahMos Aerospace Pvt. Ltd) ने इसका डिज़ाइन तैयार करने के साथ-साथ इसे विकसित भी किया है।
  • भारतीय वायुसेना दुनिया की पहली वायुसेना बन गई है, जिसने 22 नवंबर, 2017 को इस श्रेणी की जमीन पर हमला करने में सक्षम (समुद्र पर लक्षित) 2.8 मैक मिसाइल का सफलतापूर्वक परीक्षण किया।
  • विमान में इस प्रकार के हथियार को जोड़ना एक जटिल प्रक्रिया थी, क्योंकि इसके लिये विमान में मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल और सॉफ्टवेयर सुधार किये जाने की आवश्यकता थी।
  • भारतीय वायुसेना अपने अस्तित्व में आने के बाद से इस कार्य में लगी हुई है।
  • विमान के सॉफ्टवेयर को विकसित करने का काम भारतीय वायुसेना के इंजीनियरों ने किया, जबकि एचएएल (Hindustan Aeronautics Limited) ने मैकेनिकल और इलेक्ट्रोनिकल सुधार किए।
  • भारतीय वायुसेना, डीआरडीओ (Defence Research and Development Organisation), बीएपीएल और एचएएल के समर्पित प्रयासों ने ऐसे जटिल कार्यों को हाथ में लेने की देश की क्षमता को साबित कर दिया है।
  • ब्रह्मोस मिसाइल दिन अथवा रात तथा हर मौसम में भारतीय वायुसेना को समुद्र अथवा जमीन पर किसी भी लक्ष्य को भेदने की क्षमता प्रदान करता है।

कॉम्बेट मिशन की योग्‍यता हासिल करने वाली पहली महिला पायलट

फ्लाइट लेफ्टिनेंट भावना कंठ (Flight Lieutenant Bhawana Kanth) भारतीय वायुसेना की पहली ऐसी महिला पायलट बन गई हैं जिन्होंने फाइटर जेट में कॉम्बेट मिशन (Combat Missions) पर जाने की योग्‍यता हासिल की है।
  • भावना कंठ ने ‘Operational By Day’ मिग-21 बाइसन (MiG-21 ‘Bison’) एयरक्राफ्ट पर कॉम्बेट मिशन में भाग लेने हेतु ऑपरेशनल सिलेबस पूरा कर लिया है।
  • ‘Operational By Day’ के लिये पायलट को अपने सिलेबस को पूरा करना होता है, जो उन्हें दिन के दौरान उड़ान भरने के लिये उचित घोषित करता है।
  • गौरतलब है कि रात्रि के समय किये जाने वाले अभियानों के प्रशिक्षण के पश्चात् भावना को रात में भी फाइटर जेट में युद्धक मिशन पर जाने की अनुमति मिल जाएगी।
  • सरकारी आँकड़ों के अनुसार, थल सेना में 3.80%, वायु सेना में 13.09% और नौसेना 6% महिलाएँ कार्यरत हैं। इस वर्ष सरकार ने तीनों सेनाओं में महिलाओं के प्रतिनिधित्त्व को बढ़ाने के उद्देश्य से उन्हें सैन्य पुलिस में शामिल करने की योजना बनाई है। 
  • बिहार के दरभंगा जिले की बेटी है. 

प्रीलिम्स फैक्ट्स: 24 मई, 2019

न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड

हाल ही में न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड (New Space India Limited-NSIL) का आधिकारिक रूप से बंगलूरु में उद्घाटन किया गया है। गौरतलब है कि न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (Indian Space Research Organisation-ISRO) की एक वाणिज्यिक शाखा है।
  • अंतरिक्ष के क्षेत्र में ISRO द्वारा की गई अनुसंधान और विकास गतिविधियों के व्यावसायिक उपयोग हेतु न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड को 100 करोड़ रुपए के अधिकृत शेयर पूंजी (पेड-अप कैपिटल 10 करोड़ रुपए) के साथ 6 मार्च, 2019 को शामिल किया गया था।
  • यह ‘एंट्रिक्स कॉर्पोरेशन’ के बाद इसरो की दूसरी व्यावसायिक शाखा है। एंट्रिक्स कॉर्पोरेशन को मुख्य रूप से वर्ष 1992 में इसरो के विदेशी उपग्रहों के वाणिज्यिक प्रक्षेपण की सुविधा हेतु स्थापित किया गया था।
उद्देश्य
  • NSIL का उद्देश्य भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रमों में उद्योग की भागीदारी को बढ़ाना है।
  • NSIL अंतरिक्ष से संबंधित सभी गतिविधियों को एक साथ लाएगा और संबंधित प्रौद्योगिकियों में निजी उद्यमशीलता का विकास करेगा।
NSIL का उत्तरदायित्व
  • टेक्नोलॉजी ट्रांसफर मैकेनिज्म के माध्यम से स्मॉल सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (Small Satellite Launch Vehicle-SSLV) और पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (Polar Satellite Launch Vehicle-PSLV) का निर्माण और उत्पादन।
  • यह उभरती हुई वैश्विक वाणिज्यिक SSLV बाज़ार की मांग को भी पूरा करेगा, जिसमें उपग्रह निर्माण और उपग्रह-आधारित सेवाएँ प्रदान करना शामिल है।

मैन बुकर अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार

जोखा अल्हार्थी (Jokha Alharthi) अपने उपन्यास 'केलेस्टियल बॉडीज़’ (Celestial Bodies) के लिये मैन बुकर अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार (Man Booker International Prize) जीतने वाली पहली अरबी लेखिका बन गई हैं।
  • बुकर पुरस्कार के तहत प्राप्त 50 हज़ार पाउंड यानी 44 लाख रुपए की धनराशि को अनुवादक और लेखक के मध्य विभाजित करना होता है। अल्हार्थी की अनुवादक अमेरिका की मर्लिन बूथ है, जो ऑक्सफ़ोर्ड विश्विद्यालय में अरबी साहित्य पढ़ाती है। 'केलेस्टियल बॉडीज़’ मूल रूप से अरबी भाषा में लिखा उपन्यास है।
  • इस उपन्यास में तीन बहनों- मय्या, अस्मा और ख्वाला की कहानी है, जो एक मरुस्थलीय देश में रहती हैं। उपन्यास में तीनों बहनों के ‘दासता’ के अपने इतिहास से उबर कर जटिल आधुनिक विश्व के साथ तालमेल बैठाने की जद्दोजहद का वर्णन किया गया है।
  • अल्हार्थी ओमान की पहली महिला लेखिका हैं जिनके कार्य का अंग्रेज़ी भाषा में अनुवाद किया गया है।
  • मैन बुकर अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार को वर्ष 2005 में स्थापित किया गया था और वर्ष 2016 में यह अनुवादित कथा/कार्य की श्रेणी में एक पुरस्कार के रूप में परिणत हो गया।
  • वार्षिक रूप से यह पुरस्कार अंग्रेज़ी में अनुवादित और यूनाइटेड किंगडम या आयरलैंड में प्रकाशित कार्य के लिये प्रदान किया जाता है।
  • मैन बुकर अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार अंग्रेज़ी भाषा से इतर अन्य भाषाओं में कार्य करने वाले लेखकों पर केंद्रित है।
  • वर्ष 1969 में शुरू हुए मैन बुकर पुरस्कार (Man Booker Prize) का उद्देश्य अंग्रेज़ी भाषा में लिखे और यूनाइटेड किंगडम में प्रकाशित सर्वश्रेष्ठ उपन्यास को पुरस्कृत करना है।
  • वर्ष 2018 में अन्ना बर्न्स (Anna Burns) के उपन्यास 'मिल्कमैन' (Milkman) को यह पुरस्कार प्रदान किया गया था।

अक्षय ऊर्जा क्षेत्र के निकायों हेतु ‘प्राप्ति’ वेब पोर्टल

नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (Ministry of New and Renewable Energy-MNRE) अक्षय ऊर्जा क्षेत्र के निकायों हेतु ‘प्राप्ति’ वेब पोर्टल की तरह एक वेब स्थापित करने पर भी विचार कर रहा है ताकी भुगतान में देरी का सार्वजनिक रूप से खुलासा किया जा सके।
‘प्राप्ति’ वेब पोर्टल
विद्युत मंत्रालय ने वर्ष 2018 में बिजली भुगतानों में पारदर्शिता लाने हेतु प्राप्ति (PRAAPTI-Payment Ratification And Analysis in Power procurement for bringing Transparency in Invoicing of generators) नामक एप तथा वेब पोर्टल लॉन्च किया था।
  • ‘प्राप्ति’ एप तथा वेब पोर्टल बिजली खरीद में बिजली उत्पादकों और बिजली वितरण कंपनियों के बीच पारदर्शिता लाने के लिये विकसित किया गया।
  • यह एप और वेब पोर्टल बिजली उत्पादकों से विभिन्न दीर्घकालिक बिजली खरीद समझौतों के लिये चालान और भुगतान डाटा कैप्चर करता है।
  • इससे हितधारकों को बिजली खरीद के मामले में वितरण कंपनियों की बकाया राशि का मासिक और पारंपरिक आँकड़ा प्राप्त करने में मदद मिलती है।
  • यह एप यूज़र्स को बिजली वितरण कंपनियों द्वारा बिजली उत्पादक कंपनी को किये गए भुगतानों से संबंधित ब्योरा जानने की अनुमति प्रदान करती है।
  • उपभोक्ता बिजली उत्पादक कंपनियों को किये गए भुगतान के संदर्भ में बिजली वितरण कंपनियों के वित्तीय कार्य-प्रदर्शन का मूल्यांकन कर सकने में सक्षम हैं।
  • यह पोर्टल बकाया भुगतानों के बारे में बिजली वितरण कंपनियों और उत्पादक कंपनियों के बीच सुलह कराने में भी मददगार है।
  • पोर्टल विभिन्न बिजली उत्पादक कंपनियों को भुगतान सहजता के बारे में विभिन्न राज्यों की बिजली वितरण कंपनियों के तुलनात्मक मूल्यांकन में मदद देता है।

ख्याल

ख्याल हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत का एक रूप है। ‘ख्याल’ शब्द फारसी से लिया गया है जिसका अर्थ ‘विचार या कल्पना’ है।
  • कहा जाता है कि 13वीं-14वीं शताब्दी में अमीर खुसरो ने इसे प्रोत्साहन दिया था।
  • 15वीं शताब्दी के सुल्तान मोहम्मद शर्की को इस प्रारूप को प्रोत्साहित करने का श्रेय दिया जाता है। हालाँकि 18वीं शताब्दी के नियामत खान सदारंग और अदारंग ने इसे परिपक्व बनाया।
  • ख्याल के दो रूप विद्यमान हैं-
  • धीमी या विलंबित ख्याल
  • तेज़ या द्रुत ख्याल
  • विलंबित ख्याल में गाए जाने वाले ख्याल बड़े ख्याल कहलाते हैं जिन्हें विलंबित एक ताल, तीनताल, झूमरा, आड़ा चौताल इत्यादि में गाया जाता है। छोटा ख्याल मध्य लय या द्रुत लय में शुरू किया जाता हैं जिसे प्राय: त्रिताल और एक ताल में गाया जाता है।
  • दोनों प्रकार के ख्यालों के दो खंड होते हैं- अस्थायी और अंतरा। अस्थाई और अंतरा मिलकर एक गीत, एक रचना या बंदिश बनाते हैं।
  • आमतौर पर, इन ख़याल बंदिशों का विषय स्वभाव से रोमानी होता है।
  • ख्याल संगीत के अंतर्गत प्रमुख घराने (स्कूल) ‘ग्वालियर घराना’, ‘आगरा घराना’, ‘जयपुर अतरोली घराना’, ‘रामपुर सहसवान घराना’ हैं।

ठुमरी

  • ‘ठुमरी’ शब्द का प्रयोग उत्तर भारतीय संगीत की एक विशेष प्रकार की गेयविधा हेतु किया जाता है। 17वीं शताब्दी में फकीरुल्लाह कृत ‘रागदर्पण’ ग्रंथ में भी बरवा धुन या राग को ठुमरी कहा गया है।
  • मिर्ज़ा खान (17वीं शताब्दी) कृत ‘तोहफफ़तुलहिन्द’ और जयपुर के राजा सवाई प्रताप सिंह (18वीं शताब्दी) कृत ‘श्री राधाा गोविंद संगीतसार’ ग्रंथ में भी ठुमरी का उल्लेख एक राग के रूप में किया गया है।
  • आचार्य रामचन्द्र शुक्ल के अनुसार, ‘ठुमरी’ शब्द, हिंदी के अंतर्गत मूलतः ब्रजभाषा का संज्ञा स्त्रीलिंग शब्द है।
  • सामान्तया लोगों की धारणा है कि 19वीं शताब्दी में अवध के शासक वाजिद अली शाह के समय लखनऊ दरबार से ठुमरी गान शुरू हुआ।
  • ठुमरी एक रागों का एक मिश्रित रूप है जो आमतौर पर अर्द्ध-शास्त्रीय भारतीय संगीत माना जाता है।
  • इस शैली की उत्पत्ति उत्तर प्रदेश के पूर्वी भाग में हुई थी। इसमें भगवान श्रीकृष्ण और राधा के जीवन के प्रसंगों का वर्णन किया जाता है। यह एक मुक्त गायन शैली है, जिसमें कम-से-कम शब्दों के द्वारा अधिकाधिक अर्थों को संगीत के माध्यम से व्यक्त किया जाता है।
  • यह अपनी संरचना और प्रस्तुति में अधिक गीतात्मक है। ये प्रेमगीत होते हैं, इसलिये शब्द रचना अति महत्त्वपूर्ण होती है।
  • ठुमरी का गायन एक विशिष्ट मनोदशा में होता है। इसी आधार पर इसे खमाज़, काफी, भैरवी आदि रागों में प्रस्तुत किया जाता है। इसमें संगीतात्मक व्याकरण का सख्ती से पालन नहीं किया जाता है।
  • ठुमरी गायन की दो शैलियाँ हैं- पूरब या बनारस शैली, यह धीमी और सौम्य शैली है और पंजाबी शैली, यह अधिक जीवंत है।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण और राष्ट्रीय कैंसर ग्रिड

राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (National Health Authority- NHA) और नेशनल कैंसर ग्रिड ने आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (Ayushman Bharat-Pradhan Mantri Jan Arogya Yojana) के तहत एक ‘समझौता ज्ञापन’ पर हस्ताक्षर किये हैं।
  • यह ‘समझौता ज्ञापन’ मौजूदा कैंसर उपचार पैकेजों, सेवाओं के मूल्य निर्धारण और आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत शामिल मानक उपचारों के कार्यों की संयुक्त रूप से समीक्षा करेगा और कैंसर देखभाल की गुणवत्ता को बढ़ाने के लिये उचित कदम उठाएगा।
राष्ट्रीय कैंसर ग्रिड (NCG)
  • राष्ट्रीय कैंसर ग्रिड (National Cancer Grid-NCG) देश भर में प्रमुख कैंसर केंद्रों, अनुसंधान संस्थानों, रोगी समूहों और धर्मार्थ संस्थानों का एक नेटवर्क है जिसका गठन अगस्त 2012 में किया गया था।
  • उद्देश्य
  • कैंसर की रोकथाम, निदान और उपचार हेतु समान मानक स्थापित करना।
  • ऑन्कोलॉजी (Oncology) में विशेष प्रशिक्षण और शिक्षा प्रदान करना।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण
  • राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (National Health Authority) स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय से जुड़ा कार्यालय है।
  • इसके गवर्निंग बोर्ड की अध्यक्षता स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री करते हैं।
  • एनएचए को केंद्र और राज्य सरकारों, नागरिक समाज, वित्तीय और बीमा एजेंसियों, शिक्षाविदों, थिंक टैंकों, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों और अन्य हितधारकों के साथ रणनीतिक साझेदारी और सहयोग के विकास का नेतृत्व करने के लिये परिकल्पित किया गया है ताकि आयुष्मान भारत- प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के उद्देश्यों को आगे बढ़ाया जा सके।

प्रीलिम्स फैक्ट्स: 25 मई, 2019 

DRDO ने गाइडेड बम का प्रक्षेपण सम्पन्न किया

हाल ही में रक्षा अनुसंधान एवं  विकास संगठन (Defence Research and Development Organisation- DRDO) ने राजस्थान के पोखरण परीक्षण रेंज में एक सुखोई लड़ाकू विमान, सू-30 एमकेआई (Su-30 MKI) से 500 किलोग्राम श्रेणी के एक गाइडेड बम छोड़ने का सफल परीक्षण किया है।
  • बम छोड़ने की यह नई प्रणाली विभिन्न प्रकार के हथियारों को ले जाने में सक्षम है।
  • इस गाइडेड बम ने उम्मीदों पर खरा उतरते हुए निर्धारित दूरी की सीमा तक मार करने की क्षमता को हासिल कर लिया है।
  • यह प्रक्षेपण भारतीय वायुसेना (Indian Air Force- IAF) द्वारा अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह में सुखोई जेट के  सुपरसोनिक ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल के हवाई संस्करण का सफलतापूर्वक परीक्षण करने के दो दिन बाद संपन्न हुआ।

शंघाई सहयोग संगठन मास मीडिया फोरम

किर्गिज़स्तान के बिश्केक में दूसरा शंघाई सहयोग संगठन मास मीडिया फोरम 23-26 मई, 2019 तक आयोजित किया जा रहा है।
  • फोरम की बैठक में सूचना और प्रसारण मंत्रालय का एक शिष्‍टमंडल भारत का प्रतिनिधित्‍व कर रहा है।
फोरम का उद्देश्‍य
  • इस फोरम का उद्देश्‍य शंघाई सहयोग संगठन (Shanghai Cooperation Organisation- SCO) देशों के बीच मास मीडिया के क्षेत्र में सूचनाओं के आदान-प्रदान और सहयोग को मज़बूत बनाना है।
  • इस फोरम में शंघाई सहयोग संगठन के देश (सदस्‍य देश, पर्यवेक्षक देश, डॉयलग पार्टनर्स) मास मीडिया प्रतिष्ठानों के प्रतिनिधि तथा शंघाई सहयोग संगठन सचिवालय के प्रतिनिधि भागीदारी निभा रहे हैं।
  • पहला शंघाई सहयोग संगठन मास मीडिया समिट
  • पहला शंघाई सहयोग संगठन मास मीडिया समिट 01 जून, 2018 को बीजिंग में आयोजित किया गया था।
  • पहले समिट का आयोजन ‘शंघाई भावना’ के विकास के नारे के साथ किया गया था।

प्रीलिम्स फैक्ट्स: 27 मई, 2019

हिमयुग का समुद्री जल

हाल ही में यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो (University of Chicago) के शोधकर्त्ताओं ने हिंद महासागर के बीच एक रॉक फॉर्मेशन में हिमयुग के समुद्री जल का अवशेष खोजा है।
  • शोधकर्त्ताओं ने यह खोज चूना पत्थर की छान-बीन करने हेतु शुरू किये गए एक वैज्ञानिक मिशन के दौरान की।
  • इससे पहले वैज्ञानिकों को अप्रत्यक्ष सुरागों, जैसे- जीवाश्म कोरल और समुद्री तल के अवसादों के रासायनिक हस्ताक्षर से अंतिम हिमयुग के समुद्री जल का पुनर्निर्माण करना पड़ता था।
  • वैज्ञानिक अंतिमहिम युग के पुनर्निर्माण में इसलिये रुचि रखते हैं क्योंकि इसके परिसंचरण, जलवायु और मौसम को बदलने वाले पैटर्न आज से बहुत अलग थे।
  • पैटर्न को समझकर इस बात पर प्रकाश डाला जा सकता है कि भविष्य में पृथ्वी की जलवायु कैसी होगी।

भारत के प्रधानमंत्री की नियुक्ति

भारत के वर्तमान राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 75(i) की शक्तियों का प्रयोग करते हुए 27 मई, 2019 को श्री नरेंद्र मोदी को भारत का प्रधानमंत्री नियुक्त कर दिया है।
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 75
  • भारत के प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाएगी एवं उसके अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राष्ट्रपति प्रधानमंत्री के परामर्श से करेगा।
  • सभी मंत्री राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत तक कार्य करेंगे।
  • मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होगी।
  • राष्ट्रपति तीसरी अनुसूची में वर्णित कर्त्तव्यों के तहत  पद और गोपनीयता की शपथ दिलाएगा।
  • सामान्यतः प्रधानमंत्री को वही वेतन और भत्ते मिलते हैं जो एक संसद सदस्य को मिलते हैं। इसके अलावा व्यय विषयक भत्ता , स्वास्थ्य सुविधाएँ आदि भी प्राप्त होती हैं। संसद द्वारा पारित अधिनियम के तहत इन वेतन भत्तों में बदलाव किया जा सकता है।

प्रीलिम्स फैक्ट्स: 28 मई, 2019

 पोबितोरा वन्यजीव अभयारण्य

 पोबितोरा वन्यजीव अभयारण्य (Pobitora Wildlife Sanctuary) गुवाहाटी से लगभग 45 किमी दूर मोरीगाँव ज़िले में ब्रह्मपुत्र नदी के बाढ़ के मैदान में स्थित है।
  • पोबितोरा वन्यजीव अभयारण्य का मात्र 16 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र 90 से ज़्यादा गैंडों का आवास स्थल है। गौरतलब है कि इतने कम क्षेत्रफल में 90 से ज़्यादा गैंडों का रहना इस अभयारण्य को दुनिया के उच्चतम जनसंख्या घनत्व वाला अभयारण्य बनाता है।
  • गैंडे के अलावा तेंदुआ, फिशिंग कैट, जंगली बिल्ली, जंगली भैंस, जंगली सुअर, चीनी पैंगोलिन आदि जैसे अन्य स्तनधारी भी यहाँ पाए जाते हैं।
  • सर्दियों में पोबितोरा पक्षियों के लिये स्वर्ग बन जाता है, जिसमें हज़ारों जलप्रपात आर्द्रभूमि को रोमांचित करते हैं।
  • पोबितोरा को तीन अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है: वन, घास का मैदान और जल निकाय।

आकाश-एमके-1 एस

हाल ही में रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (Defence Research and Development Organisation- DRDO) ने चांदीपुर, ओडिशा से आकाश- एमके-1एस (AKASH-MK-1S) मिसाइल का सफलतापूर्वक परीक्षण किया है।
  • आकाश- एमके -1 मौजूदा आकाश मिसाइल का एक उन्नत संस्करण है जो स्वदेशी तकनीक से लैस है।
  • आकाश- एमके -1 सतह से हवा में मार करने में सक्षम एक मिसाइल है जो हवाई लक्ष्यों पर सटीक निशाना लगा सकती है।
  • आकाश हथियार प्रणाली में कमांड संचालन और सक्रिय टर्मिनल संचालन दोनों का संयोजन है।

डॉ. ली जोंग वुक मेमोरियल प्राइज़

हाल ही में इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (Indian Council of Medical Research- ICMR) के प्रोफेसर बलराम भार्गव को डॉ. ली जोंग वुक मेमोरियल प्राइज़ फॉर पब्लिक हेल्थ से सम्मानित किया गया है। उन्हें यह सम्मान अनुसंधान व प्रशिक्षण कार्य में योगदान हेतु दिया गया है। प्रोफेसर बलराम भार्गव इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के महानिदेशक हैं।
सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिये डॉ. ली जोंग वुक मेमोरियल प्राइज़
  • सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिये डॉ. ली जोंग वुक प्राइज़ की स्थापना वर्ष 2008 में की गई थी।
  • इसे सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले लोगों, सरकारी संगठनों तथा गैर-सरकारी संगठनों (Non-Governmental Organizations- NGO) को प्रदान किया जाता है।
  • यह एक वार्षिक पुरस्कार है, इसे विश्व स्वास्थ्य सभा के दौरान एक विशेष समारोह में प्रदान किया जाता है।
  • दक्षिण कोरिया के डॉ. ली जोंग वुक (Dr. Lee Jong Wook) वर्ष 2003 से वर्ष 2006 तक विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization- WHO) के महानिदेशक थे।
  • WHO के महानिदेशक बनने से पहले डॉ. ली अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य और विकास में आने वाली सबसे बड़ी चुनौतियों (‘तपेदिक’ और ‘टीके से बचाव योग्य बच्चों की बीमारियों’) के खिलाफ संघर्षरत थे।

प्रीलिम्स फैक्ट्स: 29 मई, 2019

वीर सावरकर

28 मई को स्वतंत्रता सेनानी वीर दामोदर सावरकर की जयंती मनाई गई।
वीर सावरकर के बारे में
  • वीर सावरकर का पूरा नाम विनायक दामोदर सावरकर था। इनका जन्म 28 मई, 1883 को महाराष्ट्र के नासिक ज़िले के भागुर ग्राम में हुआ था।
  • सावरकर इंडिया हाउस (India House) नामक राष्ट्रवादी संस्था से जुड़े थे एवं उन्होने अभिनव भारत और फ्री इंडिया सोसाइटी (Free India Society) की स्थापना भी की थी।
  • वर्ष 1910 में सावरकर को क्रांतिकारी समूह इंडिया हाउस के साथ संबंधों के चलते गिरफ्तार किया गया था।
  • वर्ष 1911 में ब्रिटिश सरकार ने सावरकर को 50 वर्ष के कठोर कारावास की सज़ा सुनाकर उन्हें अंडमान निकोबार दीप समूह में स्थित कालापानी जेल में डाल दिया गया। लेकिन वर्ष 1921 में उन्हें रिहा कर दिया गया।
  • वीर सावरकर एक स्वतंत्रता सेनानी, राजनीतिज्ञ, वकील, लेखक, समाज सुधारक और हिंदुत्व दर्शन के सूत्रधार थे।
  • वर्ष 1923 में उन्होंने ‘हिंदुत्व’ (Hindutva) शब्द की व्याख्या की और कहा कि भारत केवल उन्ही लोगों का है जो इसे ‘पितृभूमि’ और ‘पवित्र भूमि’मानते हैं।
  • वीर सावरकर ने अपनी पुस्तक हिंदुत्व (Hindutva) में द्विराष्ट्र सिद्धांत (Two-nation Theory) का प्रतिपादन किया जिसमें हिंदुओं और मुसलमानों के लिये दो अलग-अलग राष्ट्रों की बात कही गई जिसे वर्ष 1937 में हिंदू महासभा ने एक संकल्प के रूप में पारित किया।
  • वर्ष 2000 में अंडमान और निकोबार की राजधानी में पोर्ट ब्लेयर में स्थित हवाई अड्डे का नाम बदलकर वीर सावरकर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा रखा गया।

केरल आपदा सेस (Flood cess) लगाने वाला पहला राज्य

केरल सरकार 1 जून, 2019 से राज्य में 5% से अधिक GST वाली वस्तुओं पर 1% का अतिरिक्त कर आरोपित करेगी।
  • इसके साथ ही केरल आपदा सेस (Flood cess) लगाने वाला देश का पहला राज्य बन जाएगा।
  • इस आपदा सेस/उपकर का उद्देश्य राज्य के पुनर्निर्माण हेतु धन जुटाना है, जो कि अगस्त 2018 में आई विनाशकारी बाढ़ के कारण बहुत अधिक प्रभावित हुआ था।
  • इस उपकर (Cess) की घोषणा राज्य सरकार के बजट सत्र के दौरान ही कर दी गई थी।
  • यह कर 1 जून, 2019 से 2 वर्षों की अवधि के लिये आरोपित किया जाएगा।
  • रेलवे सेवाओं, फिल्म के टिकटों पर यह कर लागू नहीं होगा।
  • उपकर के बोझ को कम करने के लिये छोटे व्यापारियों (जिनका सालाना कारोबार 1.5 करोड़ रुपए से कम हो) द्वारा बेचे जाने वाले उत्पादों पर कोई अतिरिक्त कर नहीं लगाया जाएगा।
  • यह उपकर केवल केरल राज्य के भीतर होने वाले लेन-देन पर ही लागू होगा, न कि अंतर्राज्यीय लेन-देन पर।
  • सरकार ने सोने और चांदी पर भी बाढ़ उपकर के रूप में 0.25% का अतिरिक्त कर लगाने का फैसला किया है।
उपकर (Cess)
  • उपकर या सेस, कर के ऊपर लगने वाला कर है जो आमतौर पर विशिष्ट उद्देश्यों की पूर्ति हेतु लगाया जाता है।
  • एक बार इसका उद्देश्य पूरा हो जाने के बाद इस पर रोक लगा दी जाती है। अन्य करों (जिन्हें अन्य भारतीय राज्यों के साथ साझा किया जाता है) के विपरीत, उपकर के माध्यम से प्राप्त होने वाली संपूर्ण राशि केंद्र सरकार के पास संग्रहित की जाती है।
  • समर्पित खातों में स्थानांतरित होने से पहले सेस से प्राप्त राशि को भारत की समेकित निधि (Consolidated Fund of India) में रखा जाता है।
उपकर के प्रकार
  • 1 जुलाई, 2017 से GST के तहत कुछ उपकरों को शामिल किया गया है, जैसे- कृषि कल्याण उपकर (Krishi Kalyan Cess), स्वच्छ भारत उपकर (Swachh Bharat Cess), स्वच्छ ऊर्जा उपकर (Clean energy cess), चाय चीनी और जूट आदि पर उपकर।
  • वर्तमान में केंद्र सरकार द्वारा 6 प्रकार के उपकर को GST से बाहर रखा गया है, ये हैं- प्राथमिक शिक्षा उपकर, माध्यमिक शिक्षा उपकर, कच्चे पेट्रोलियम पर उपकर, सड़क उपकर और तंबाकू एवं तंबाकू उत्पादों पर उपकर, आयातित वस्तुओं पर शिक्षा उपकर।

सामाजिक और श्रम अभिसरण कार्यक्रम

सामाजिक और श्रम अभिसरण कार्यक्रम (SLCP) कपड़ा और वस्त्र उद्योग के लिये एक मानक-तटस्थ, अभिसरण मूल्यांकन ढाँचा है।
  • यह कन्वर्जेंस असेसमेंट फ्रेमवर्क (Converged Assessment Framework-CAF) को लागू करने के लिये एक मिशन है जो वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं की कार्य स्थिति में सुधार करने हेतु विभिन्न हितधारकों के प्रयासों का समर्थन करता है।
  • CAF में डेटा संग्रहण के साधन (Data Collection Tool), सत्यापन हेतु मूल-पत्र (Verification Protocol) और सत्यापनकर्त्ता मार्गदर्शन दस्तावेज (Verifier Guidance document) शामिल होते हैं।
  • यह मौजूदा लेखांकन प्रणाली (Audit Systems) और आचार संहिताओं (Codes of Conduct) के अनुकूल है। इसके तहत समान डेटा समूह का उपयोग कई हितधारकों द्वारा किया जा सकता है। यह एक ही सुविधा हेतु बार-बार किये जाने वाले लेखांकन की आवश्यकता को समाप्त करता है।
उद्देश्य
  • सामाजिक और श्रम लेखा परीक्षा की संख्या कम करने एवं दोहराव से बचने के लिये वर्तमान मूल्यांकन साधनों के स्थान पर आधुनिक तकनीकी साधनों का प्रयोग करना।
  • सामाजिक और श्रम डेटा की अधिक तुल्यता के अवसरों में वृद्धि करना।
  • सुधार कार्यों की दिशा में संसाधनों का पुनः इस्तेमाल करना।
  • कपड़ा इकाइयों में काम करने की स्थिति में सुधार करने हेतु संसाधनों में बढ़ोत्तरी करना।
  • आपसी विश्वास और सम्मान को बनाए रखना, काम की परिस्थितियों को समझना एवं समय के साथ उन परिस्थितियों में सुधार के लिये लगातार प्रयास करना।

प्रीलिम्स फैक्ट्स: 30 मई, 2019

नाइन डॉट्स प्राइज अवार्ड - हाल ही में भारतीय लेखिका एनी ज़ैदी को वर्ष 2019 के नाइन डॉट्स प्राइज़ (Nine Dots Prize) पुरस्कार के लिये चुना गया है।

  • मुंबई में रहने वाली एनी ज़ैदी को यह पुरस्कार उनके निबंध 'ब्रेड, सीमेंट, कैक्टस' (Bread, Cement, Cactus) के लिये दिया जा रहा है।
  • अपने निबंध में उन्होंने घर और इससे जुड़ी भावनाओं को बखूबी चित्रित किया।
  • एनी ज़ैदी एक स्वतंत्र लेखिका के रूप में अखबार और पत्रिकाओं के लिये काम करती हैं और साथ ही लघु कथाएँ, कविता और नाटक भी लिखती हैं।
  • नाइन डॉट्स प्राइज़ से ऐसे लोगों को पुरस्कृत किया जाता है जो रचनात्मक सोच और विशेष लेखन शैली के ज़रिये आधुनिक मुद्दों पर लेखन कला को प्रोत्साहित करते हैं।
  • नाइन डॉट्स प्राइज़ ब्रिटेन की चैरिटेबल संस्था कदास प्राइज फाउंडेशन द्वारा दिया जाता है। इस पुरस्कार के अगले विषय के तौर पर 'इज देयर स्टिल नो प्लेस लाइक होम' पर अगला निबंध आमंत्रित किया है। निबंध की शब्द सीमा तीन हजार होगी।

कुदक्रमिया जीनस की ततैया

हाल ही में वैज्ञानिकों ने कुदक्रमिया वंश की ततैया (Wasp from the Genus Kudakrumia) की एक नई प्रजाति की गोवा में पहचान की है।
  • इस ततैया को कुदक्रमिया रंगनेकरी (Kudakrumia Rangnekari) नाम दिया गया है। गौरतलब है कि इसका नाम गोवा के एक शोधकर्त्ता पराग रंगनेकर (Parag Rangnekar) के नाम पर रखा गया है।
  • भारत में ततैया गोवा और केरल में पाई जाती है और देश के बाहर यह पड़ोसी देश श्रीलंका में भी पाई जाती है।
  • अतीत में भी शोधकर्त्ताओं ने ‘आदिकेशवुस’ नाम की पाँच ततैया प्रजातियों की खोज की है। ‘आदिकेशवुस’ एक संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ ‘लंबे बाल वाला पहला’ (first one to have long hairs) होता है।
महत्ता
  • ततैया पारिस्थितिकी तंत्र में परागण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
  • ऑर्किड की लगभग 100 प्रजातियाँ परागण के लिये केवल ततैया पर निर्भर रहती हैं।
  • ट्रॉपिकल सोशल वास्प, पॉलीबिया पॉलिस्ता (Tropical social wasp, Polybia paulista) के जहर में पाया जाने वाला एक रसायन, विभिन्न प्रकार की कैंसर कोशिकाओं को चुनिंदा रूप से नष्ट करने में सक्षम है।
  • कई सोशल वास्प (ततैया) शिकारी भी होती हैं, जिसका अर्थ है कि वे प्रजातियों की एक विस्तृत श्रृंखला की आबादी को नियंत्रित करती हैं। यह विषाक्त कीटनाशकों की आवश्यकता को कम करने के लिये बेहद उपयोगी साबित हो सकती है।

माउंट अगुंग ज्वालामुखी

हाल ही में इंडोनेशिया के बाली द्वीप पर सक्रिय ज्वालामुखी माउंट अगुंग में विस्फोट हो गया।
  • माउंट अगुंग (Mount Agung) एक सक्रिय ज्वालामुखी है, जो इंडोनेशिया के बाली द्वीप पर स्थित है। इसे गुनुंग अगुंग (Gunung Agung) के नाम से भी जाना जाता है।
  • यह बाली द्वीप का सर्वोच्च स्थान माना जाता है।
  • माउंट अगुंग एक जागृत ज्वालामुखी है जिसमें ऐतिहासिक रूप से लगातार विस्फोट होते रहे हैं।

जागृत ज्वालामुखी (Strato Volcano)
  • यह ज्वालामुखी लंबा एवं शंक्वाकार होता है जो कठोर लावा, टेफ्रा की पर्तों से मिलकर बना होता है।
  • इन ज्वालामुखियों में होने वाले विध्वंसक विस्फोट इनकी प्रमुख विशेषता है।
  • इससे निकलने वाले लावा की श्यानता बहुत अधिक होती है, जिस कारण यह ठंडा होने के बाद ज़्यादा कठोर हो जाता है।
  • इंडोनेशिया में ऐसी ज्वालमुखी घटनाएँ होना सामान्य बात है। क्योंकि यह देश प्रशांत महासागर के ‘रिंग ऑफ फायर’ पर स्थित है जहाँ पर विवर्तनिक प्लेटों के आपस में टकराने के फलस्वरूप भूकंपीय और ज्वालमुखी घटनाएँ घटित होना एक सामान्य बात मानी जाती है।
  • 75% या 750 से अधिक ज्वालामुखी, रिंग ऑफ फायर पर स्थित हैं और 90% भूकंप इन्ही विवर्तनिक प्लेटों के कारण आते हैं।
  • जावा, बाली और कई अन्य इंडोनेशियाई द्वीपों के ज्वालामुखी ऑस्ट्रेलिया और सुंडा टेक्टोनिक प्लेटों के बीच टकराव द्वारा निर्मित हुए हैं।
  • सुंडा-जावा ट्रेंच (Sunda-Java Trench) का निर्माण ऑस्ट्रेलिया प्लेट (Australia Plate) एवं सुंडा प्लेट (Sunda Plate) के बीच टकराव से होता है जिसमें ऑस्ट्रेलिया प्लेट सुंडा प्लेट के नीचे आ जाती है।
  • ऑस्ट्रेलिया प्लेट जब लगभग 100 मील की गहराई तक पहुँच जाती है, तब यह पिघलने लगती है एवं गर्म और पिघला हुआ पदार्थ सतह से ऊपर की ओर बढ़ने लगता है, जिससे इंडोनेशियाई ज्वालामुखी में विस्फोट हो जाता है।

प्रीलिम्स फैक्ट्स: 31 मई, 2019

All Credit : Drishti IAS - https://drishtiias.com/

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